0
ज्योतिषाचार्य डॉ. हरिहरराम त्रिपाठी ने कहा कि वृहस्पतिवार व्रत हर तरह की मनोकामनाएं पूर्ण करता है। इस दिन व्रत रहकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। जगत के पालक भगवान विष्णु हर तरह से भक्तग की मनोकामना पूर्ण करते हैं। विष्णु पुराण के अनुसार देवर्षि नारद के परामर्श पर माता पार्वती ने वर प्राप्ति के लिए सर्वप्रथम यह व्रत किया था। इस व्रत के अधिष्ठाता श्रीहरि विष्णु हैं, जिन्हें जगत सृष्टि मंन पालनकर्ता के रूप में जाना जाता है। अनादि काल से इस व्रत का महत्व इच्छित वर प्राप्ति के लिए जाना जाता है। विशेषतया इस व्रत को वर प्राप्ति के लिए कन्याएं रहती हैं। लेकिन किसी भी आयु वर्ग के लोग यह व्रत रहकर इच्छित फल प्राप्त कर सकते हैं। इस व्रत को 16 या 21 वृहस्पतिवार संकल्पसहित रहना चाहिए। हर वृहस्पतिवार व्रत तो अत्यंत उत्तम है

विधान

प्रात:काल नित्य क्रिया से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। केले के वृक्ष के पास दीप जलाएं और उसका पूजन करें। वहीं पीले आसन पर बैठकर व्रत कथा का पाठ करें। इस व्रत में पीले पुष्प, पीले फल आदि ही भगवान को चढ़ाए जाते हैं। व्रती का वस्त्र भी पीला ही होना चाहिए। पाठ के बाद ‘ऊं नमो नारायणाय’, ‘ऊं विष्णवे नम:’, ‘ऊं श्रीगुरुवे नम:’ या ‘ऊं ब्रीं वृहस्पतये नम:’ में से किसी एक मंत्र का मनोकामनानुसार 108 बार जप करना चाहिए। पूजन, पाठ व मंत्र जप के बाद दूध या फल ग्रहण किया जा सकता है। शाम को भी भगवान को भोग लगाकर फलाहार ही ग्रहण करना चाहिए। इस व्रत में केला नहीं ग्रहण किया जाता। पारण दूसरे दिन करना चाहिए।

key word: guruwar vart, brispati vart, thirstday fasting

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top