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जो लोग पितृ पक्ष के पंद्रह दिनों तक श्राद्ध-तर्पण आदि नहीं कर पाते तथा जिन पितरों की मृत्यु तिथि याद न हो, उन सबके निमित्त श्राद्ध-तर्पण-दान आदि सर्वपितृ अमावस्या को किया जाता है। यह पितृपक्ष का अंतिम दिन है। इसी दिन को पितृ विसर्जन किया जाता है।
ज्योतिषी पं. शरदचंद्र मिश्र का कहना है कि शास्त्रीय मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष में श्रद्धादि की आशा में पितर अपने पुत्रादि के द्वार पर आते हैं। पितरों का विसर्जन अश्विन अमावस्या के ही दिन होता है। यद्यपि प्रत्येक अमावस्या पितरों की पुण्य तिथि होती है लेकिन अश्विन मास की अमावस्या पितरों के लिए परम पुनीत तिथि मानी गयी है। इस अमावस्या को सर्वपितृ विसर्जनी अमावस्या या महालया भी कहते हैं। इस दिन तिलांजलि इत्यादि न पाने पर पितर शाप देकर चले जाते हैं, इसके कारण जीवन में में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

अमावस्या को श्राद्ध विधि
पार्वण श्राद्ध करने के बाद श्राद्धकर्ता को पूर्वाभिमुख होकर हाथ में तिल, कुश व जल लेकर यथा विधि संकल्प कर पंचबलि दान पूर्वक ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। अश्विन अमावस्या 15 अक्‍टूबर को है।

पंचबलि विधि विधान
1- गोबलि : श्राद्ध स्थान से थोड़ी दूर पश्चिम तरफ जाकर ‘ऊं सौरभेय्य: सर्वहिता’ मंत्र पढ़ते हुए पत्ते पर गो के लिए ग्रास निकालें तथा ‘इदं गोभ्‍यो न मम्’ कहें।
2- श्वान बलि : यज्ञोपवीत को गले में लपेटकर ‘दौ श्वानौ श्याम शबलौ’ मंत्र पढ़ते हुए कुत्तों को पत्ते पर ग्रास दें तथा ‘इदं श्वभ्‍यां न मम्’ कहें।
3- काक बलि : अपसव्य (दक्षिणाभिमुख) होकर ‘ऊं ऐन्द्रे वारुण वायाव्या’ मंत्र पढ़कर कौओं को भूमि पर अन्न दें, साथ ही इस मंत्र को बोलें- इदं वायसेभ्‍यो न मम्।
4- देवादि बलि : सव्य (पूर्वाभिमुख) होकर ‘ऊं देवा मनुष्या: पशवो’ मंत्र पढ़ते हुए देवादि के लिए पत्ते पर अन्न दें तथा ‘इदं देवादिभ्‍यो न मम्’ कहें।
5- पिपीलिकादि बलि : सव्य होकर ‘पिपीलिका कीट पतंगकाया’ मंत्र बोलते हुए थाली में सभी प्रकार के पकवान परोस कर दक्षिणभिमुख होकर निम्न संकल्प करें-
‘ममपितु: मातु: महालये श्राद्धे सर्वपितृ विसर्जनामभावास्यायां अक्षय तृप्तर्थमिदमन्नं तस्मै तस्यै वा स्वधा’। इसके बाद ब्राह्मण भोज का संकल्प लें। अन्नदान का संकल्प पितृतीर्थ के नीचे छोड़ें। पुन: पूर्वाभिमुख होकर ‘ऊं गोत्र नो वर्द्धतां दातारं नोभिवर्धताम्’ मंत्र से पितृ रूपी जनार्दन से आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और यथाशक्ति दान दें।

keywoed: hindu

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