0
पितृपक्ष 1 अक्टूबर से लेकर 15 अक्टूबर तक है। परन्तु 1 अक्टूबर को मध्याह्न में प्रतिपदा न होने से प्रतिपदा का श्राद्ध 30 सितम्बर को किया जाएगा। कृष्ण पक्ष में पूर्णिमा नहीं होती है, इसलिए शास्त्रकारों ने पूर्णिमा तिथि में पितरों के लिए कृष्ण पक्ष से एक दिन पूर्व ही श्राद्ध का विधान निर्धारित कर दिया है। पूर्णिमा का श्राद्ध 29 सितम्बर को संपन्न किया जाएगा। इस प्रकार इस वर्ष 17 दिनों तक श्राद्ध का कार्य होगा। पितृ पक्ष में सात पीढ़ियों के पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। श्राद्ध में पिण्डदानादि क्रिया संपन्न करने के पश्चात पंचबलि विधान के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा आदि देना चाहिए।
श्राद्ध वाले दिन श्वेत वस्त्र धारण कर अपने पितरों का मानसिक स्मरण करें और हाथ में तीन कुश, काला तिल व जल लेकर संकल्प करें। संकल्प के जल को भूमि पर छोड़ देना चाहिए। फिर पिण्डदान करने के बाद ब्राह्मण भोजन से पूर्व पंचबलि (गोबलि, श्वानबलि, काक बलि, देवादि बलि व पिपीलिका बलि) करनी चाहिए।
गोबलि- गोबलि देते समय जब पत्तल पर खाद्य सामग्री रखी जाय तो निम्न मंत्र का उच्चारण करें-
सौरभेय्य: सर्वहिता: पवित्रा: पुण्यराशय:।
प्रतिगृहणन्तु में ग्रासं गावस्त्रैलोक्य मातर:।। इदमन्नं गोभ्‍यो न मम्।
श्वान बलि निकालते समय का मंत्र-
द्वौ श्वानौ श्यामसबलौ वैवस्वत कुलोद्भवौ। ताभ्‍यामन्नं प्रयच्छामि स्यातामेवावहिंसकौ।। इदमन्नं श्वाभ्‍या न मम्।
काक बलि निकालते समय का मंत्र-
ऐन्द्र वारुण वायव्या याम्या वै नैर्ऋतास्तथा। वायसा: प्रतिगृहणन्तु भूमौ पिण्डं मयोज्झितम्।। इदमन्नं वायसेभ्‍यो न मम्।
देव बलि निकालते समय का मंत्र-
देवा मनुष्या: पशवो वयासि सिद्धा: सयक्षोरग दैत्यसंघा। प्रेता: पिशाचास्तवरव: समस्ता ये चान्नमिच्छन्ति मया प्रस्तम्।। इदमन्नं देवादिभ्‍य: न मम्।
पिपीलिका बलि निकालते समय का मंत्र-
पिपीलिका: कीटपतंगकाद्या वुभुक्षिता: कर्म निबन्धबद्धा:। तेषां हि तृप्त्यर्थमिदं मयान्नं तेभ्‍यो विसृष्टं सुजिनो भवन्तु।। इदमन्नं पिपीलिकादिभ्‍यो न मम्।
यह सभी क्रियाएं मध्याह्न में की जाती हैं। श्राद्ध का पूर्ण फल श्रद्धा पर निर्भर है। यदि श्राद्ध करने में असमर्थ हैं तो पितरों के नाम से गाय को चारा निकाल दें। यदि ऐसा भी संभव नहीं है तो दोनों हाथ उठाकर प्रार्थना करें- हे पितृगण! मेरे पास श्राद्ध के लिए कुछ भी नहीं है। न तो धन है और न ही धन-धान्य। मेरे पास केवल श्रद्धा व भक्ति है। आप इसे ग्रहण कर मुझपर कृपा करें।

keyword: hindu

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top