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ओशो कहते हैं कि प्रार्थना एक भाव दशा है। परमात्मा के साथ, स्वयं के साथ होने की। प्रार्थना में बोल सकते हैं, परन्तु ध्यान रहे तुम्हारी प्रार्थना परमात्मा को, अस्तित्व को बदलने वाली नहीं है। प्रार्थना भक्ति की बात नहीं, ऊर्जा जाग्रत करने का प्रयास है।
ध्यान प्रयोग में ऊर्जा को अपने अस्तित्व को अस्तित्व से अपने भीतर बहने देना है तथा ऊर्जा को पृथ्वी को समर्पित करना है। उस बहने देने में हम ऊर्जा से नहा जाएंगे। रात सोने से पूर्व करें, उत्तम समय है। दिन में भी जब चाहें कर सकते हैं। रात को ध्यान करने के बाद सो जाओ, पूरी रात नींद ध्यानमय, स्वप्न रहित हो जाएगी तथा नींद गहरी होती जाएगी।
ध्यान विधि
संगीत शुरू कर बज्रासन या सुखासन में बैठ जाएं। बज्रासन ज्यादा उत्तम है। कल्पना करें कि आप ऊर्जा के झरने के नीचे हैं। चारो ओर ऊर्जा ने घेर रखा है। दोनों हाथ सामने की ओर उठा लें। पांचों उंगलियां आपस में चिपकी हुई हों। हथेलियों को आकाश की ओर फैला दें।
दो से तीन मिनट के बाद अनुभव करोगे कि ऊर्जा हाथों के माध्यम से बह रही है और ऊर्जा से हाथ भारी होने शुरू हो जाएंगे। शुरू शुरू में ऊर्जा महसूस न हो तो चिंता न लें, धीरे-धीरे महससू होना शुरू हो जाएगी। जब हाथ ऊर्जा से भर जाए, भारी हो जाए तो आगे की ओर झुक जाएं, माथा व हथेली पृथ्वी को झूने दें। मोटे आदमी ऐसा न कर पाएं तो दीवार के साथ बैठ जाएं और हथेलियां दीवार के साथ लगाएं। भाव करें कि ऊर्जा पृथ्वी में बह रही है। जो दिव्य ऊर्जा आपने हाथों में ली थी वह पृथ्वी को दे रहे हैं। बस आप ऊर्जा अस्तित्व से पृथ्वी में बहने देने का माध्यम बन जाएं। दिव्य ऊर्जा, पृथ्वी और तुम घुल-मिल जाओ।
पहले हाथों से ऊर्जा को भरो, फिर ऊर्जा पृथ्वी में बहने दो, संगीत की समाप्ति तक ऐसा दोहराते रहो। तीस मिनट के संगीत में जितनी बार हो, यह क्रम दोहरा सकें, करते रहना।
संगीत की समाप्ति पर सो जाएं। दिन में कर रहे हैं तो पंद्रह मिनट के लिए शांत, शिथिल मुर्दे की भांति लेट जाएं।
ध्यान रखें जब ऊर्जा हम पृथ्वी को दे रहे हैं तो हमारी पात्रता के अनुसार ऊर्जा हमारे शरीर में रुक जाएगी, ऐसे ही शरीर की ऊर्जा ग्रहण पात्रता बढ़ती जाएगी तथा हाथों से ऊर्जा ग्रहण करने का समय भी कम होता जाएगा। धीरे-धीरे हम ऊर्जावान होते जाएंगे। ध्यान प्रयोग काफी शक्तिशाली है। ऊर्जा जागरण पर, ऊर्जा के कारण शरीर में कंपन या झनझनाहट हो तो होने दें, भय ना लें।

सरल ध्‍यान विधियां से साभार


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