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ज्योतिषाचार्य डॉ. जोखन पाण्डेय शास्त्री ने कहा कि मंगलवार के दिन ही हनुमानजी का जन्म हुआ था। मंगल पाप ग्रह है। इसलिए इस दिन जो हनुमानजी की उपासना करता है उसे मंगल पाप फल नहीं देता। मंगल पृथ्वी का पुत्र है, इसे शिव का अंश भी कहा जाता है। इसलिए मंगल भूमि, भवन, वाहन का कारक होता है। संतान प्राप्ति के लिए भी मंगलवार का व्रत किया जाता है। ऋण से मुक्ति के लिए ‘ऋण मोचन स्तोत्र’ का पाठ मंगलवार के व्रत में या मंगलवार को करने से ऋण से मुक्ति मिलती है। इस व्रत से भूमि व भवन का सुख अवश्य ही प्राप्त होता है। सौ बार कोई हनुमान चालीसा का पाठ कर ले तो उसे बंधन से मुक्ति मिल जाती है। ऋण से मुक्ति के लिए मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत का भी बहुत महत्व है।

व्रत विधान
मंगलवार के दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्रान के बाद लाल वस्त्र धारण करके पूर्वाभिमुख बैठ जायं। सामने हनुमानजी का चित्र रखें, देशी घी या तिल के तेल का दीपक जलाकर अपनी मनोकामना का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद हनुमानजी के चित्र पर लाल चंदन, लाल फूल, सिंदूर, रोली, रक्षा सूत्र, जनेऊ, लाल फल, पेड़ा, किसमिस आदि समर्पित करके पूजन करें। पूजा के बाद हनुमान स्तुति, हनुमान चालीसा, सुन्दर काण्ड, हनुमत स्तोत्र, ऋण मोचन स्तोत्र, मंगल स्तोत्र में से किसी का भी अपनी मनोकामना के अनुसार पाठ करें। दिन भी व्रत रहकर सायंकाल गेहूं के आटा का हलवा व पूड़ी बनाकर हनुमानजी को भोग लगाएं और स्वयं ग्रहण करें। यह कार्य सूर्यास्त से पूर्व हो तो उत्तम है। इस व्रत में दो अन्न का प्रयोग नहीं होता है।
जिसकी कुण्डली में मंगल दोष कारक ग्रह हो, उसकी शांति के लिए मंगलवार के दिन व्रत के साथ लाल कपड़े पर लाल रंगे हुए चावल से त्रिकोण के आकार का मंगल का स्वरूप बनाकर लाल चीजों से पूजन करें। इसके बाद लाल वस्तुओं जैसे- गेहूं, गुड़, लाल चना, मसूर की दाल, ताम्रपात्र, लाल कंबल, लाल फल या किसी गरीब को हलवा-पूड़ी का दान करना चाहिए।


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