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नवरात्र में कुमारी पूजन का विशेष महत्व है। इससे मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्त को धन-धान्य से परिपूर्ण कर देती हैं। इसीलिए हवन के बाद नवमी तिथि को कुमारियों का पूजन किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र की मानें तो नवरात्र भर प्रतिदिन अन्यथा समाप्ति के दिन नौ कुमारियों के चरण धोकर उन्हें देवीरूप मानकर उन्हें भोजन कराना चाहिए और वस्त्र आदि प्रदान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार एक कन्या की पूजा ऐश्वर्य, दो की पूजा से भोग और मोक्ष, तीन की पूजा से धर्म, अर्थ व काम, चार की पूजा से राज्यपद, पांच की पूजा से विद्या, छह की पूजा से षट्कर्म सिद्धि, सात की पूजा से राज्य, आठ की पूजा से संपदा व नौ कुमारियों के पूजन से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।
कुमारी पूजन में एक से ऊपर 10 वर्ष तक की कन्याओं का वर्णन मिलता है। दो वर्ष की कन्या कुमारी, तीन वर्ष की त्रिमूर्तिनी, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छह वर्ष की काली, सात वर्ष की चण्डिका, आठ वर्ष की शांभवी, नौ वर्ष की दुर्गा व दस वर्ष की सुभद्रा स्वरूपा होती है।

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