0
दीपावली के दिन प्रतिवर्ष सूर्य व चंद्रमा का मिलन शुक्र के घर यानी तुला राशि में होता है। यह इस बार भी होगा। सनातन धर्म में मात्र दीपावली ही ऐसा त्योहार है जो अमावस्या के दिन मनाया जाता है।
ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र में सूर्य व चंद्रमा की युति को अशुभ माना जाता है, परन्तु दीपावली के दिन नहीं। कालपुरुष की गणना के आधार पर इस दिन सूर्य व चंद्रमा का मिलन सप्तम भाव में और तुला राशि में होता है। तुला राशि का स्वामी शुक्र है। शुक्र को सर्वाधिक शुभ ग्रह का स्थान प्राप्त है। शुक्र ग्रह मां लक्ष्मी की तरह ही समस्त भोग व ऐश्वर्य को देने वाला है। मेष लग्न में सूर्य पंचमेश और चंद्रमा चतुर्थेश होकर शुभ स्थान को प्राप्त है। सप्तम भाव से विवाह, वैवाहिक सुख, धन व व्यापार आदि का विचार किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को राजा व चंद्रमा को रानी की संज्ञा दी गई है। कार्तिक अमावस्या पर इनका मेल होता है जो सृष्टि सृजन का रहस्य है। इसलिए यह दिन श्रेष्ठ है। दीपावली पर्व होने के साथ ही प्रकाश का त्योहार भी है। ऐसे श्रेष्ठ मुहूर्त में जब सोलह श्रृंगार किए हुए पृथ्वी पर महालक्ष्मी का पदार्पण होता है तब यह रात्रि साक्षात महारात्रि बन जाती है।
सूर्य आत्मा व चंद्रमा मन का प्रतीक है। अत: अमावस्या एक ऐसा अवसर है जब मन (चंद्रमा)पूर्ण रूप से आत्मा (सूर्य) के समीप होकर आत्मस्वरूप हो जाता है। इस दिन आत्मा के प्रकाश में मन आत्मरूप हो जाता है। भौतिक व आर्थिक दृष्टि से सूर्य व चंद्रमा का सामीप्य भले ही कम शुभफलदायक हो परन्तु आध्यात्मिक दृष्टि‍ से अमावस्या से अच्छा कोई पर्व नहीं है।



keyword: dipawali, jyotish

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top