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लक्ष्मी का पूजन भगवान विष्णु के साथ करना चाहिए। क्योंकि बिना पति के पत्नी का स्थायित्व नहीं रहता और लक्ष्मी तो वैसे ही चंचला कही जाती हैं। सर्वाधिक पूजा लक्ष्मी की होने के कारण भारत को विश्व में सर्वाधिक समृद्ध होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है, क्योंकि हम लक्ष्मी की पूजा भगवान विष्णु के साथ नहीं करते।
यह बातें ज्योतिषाचार्य डॉ. धनेश मणि त्रिपाठी ने कही। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष में देवताओं का पूजन सोने-चांदी की थालियों से भरी सामग्री से होती थी। लोग सोने की थाली में भोजन करते थे। सोने के सिक्के कभी भारत की मुद्रा थे। उसके बाद क्रमश: चांदी, तांबा, गिलट व अब कागज में मुद्रा आ गई है। हमारी मुद्राओं का निरंतर क्षरण हुआ। किसी भी शिष्ट स्त्री को उसके पति की गैर जानकारी में निमंत्रित किया जाय तो पहले तो वह निमंत्रण स्वीकार नहीं करेगी। यदि प्रेम-वात्सय के कारण निमंत्रण उसने स्वीकार कर भी लिया तो कुछ देर के लिए ही आएगी। विष्णु के साथ मां लक्ष्मी को निमंत्रित नहीं करने से मां लक्ष्मी आपके भक्ति भाव के कारण आपके घर आ तो जाती हैं लेकिन शीघ्र ही विष्णु के पास चली जाती हैं। भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी का आवाहन श्रीलक्ष्मीनारायण यंत्र पर करके प्राण-प्रतिष्ठा व पूजन करें तो लक्ष्मी अपने पति के साथ होने के कारण दीर्घ काल तक आपका सत्कार पाकर रुक सकती हैं। इस प्रकार हमारा देश पुन: विश्व में सर्वाधिक समृद्ध हो सकेगा। सोने की चिड़िया से भारत पुन: अलंकृत होगा।
इस बार दीपावली मंगलवार को पड़ रही है। लोकमत के अनुसार मंगलवार को दीपावली शुभ नहीं मानी जाती। जबकि अग्निपुराण के अनुसार मंगलवार को दीपदान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। दीप चुराने वाला अगले जन्म में जड़ व गूंगा होता है। दीपवली के साथ मंगलवार प्रतिकूल मौसम, बम काण्ड, अग्निकाण्ड एवं लूटपाट की घटना कराएगा। इस वर्ष प्रात: 6.30 बजे 8.47 बजे तक शास्त्र, बिजली, ज्वलनशील पदार्थ, भूमि, भवन से संबंधित प्रतिष्ठानों तथा सायं 5.16 से 7.12 बजे तक विद्यार्थियों, कपड़े, ताराजू न रखने वाले प्रतिष्ठान, सौन्दर्य, धातु व रत्न तथा रात को 11.40 से 1.58 के बीच मंत्र-तंत्र साधना व अन्य सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों के पूजन का श्रेष्ठ समय है। दीप प्रज्वलित करना चाहिए। निर्विघ्नता के लिए सर्वप्रथम गणेश पूजन आवश्यक है।


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