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1em; margin-right: 1em;">श्रीमहालक्ष्मी पूजन कार्तिक कृष्ण अमावस में प्रदोष काल व अर्धरात्रि व्यापिनी तिथि हो तो विशेष शुभ माना जाता है। इस वर्ष 13 नवम्बर को दीपावली स्वाति, विशाषा नक्षत्र, सौभाग्य योग कालीन प्रदोष, अर्धरात्रि व्यापिनी व अमावस्या युक्त होने से विशेषत: प्रशस्त व श्लाघ्य रहेगी। मंगलवार की दीपावली मंत्र जप, सिद्धि एवं तांत्रिक प्रयोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। दीपावली में अमास्या तिथि, प्रदोष काल, निशीथ काल व महानिशीथ काल विशेष महत्वपूर्ण माने जाते हैं। 13 नवम्बर को सूर्योदय 6.35 बजे और अमावस्या तिथि का मान 24 दंड 23 पला अर्थात रात्रिशेष 4 बजकर 20 मिनट तक है। इसलिए दीपावली के लिए यह उत्तम दिन है।
प्रदोष काल: 13 नवम्बर दिन मंगलवार को सूर्यास्त 5.25 बजे है। प्रदोष काल रात्रिमान के अनुसार तीन मुहूर्त अर्थात 5.25 से रात्रि 8.1 बजे तक रहेगा। इसमें वृष लग्न 5.37 बजे से 7.33 बजे तक लक्ष्मी पूजन के लिए विशेष प्रशस्त रहेगा। इसके बाद 7.4 बजे से 8.43 बजे तक चर वेला की चौघड़िया भी उत्तम रहेगी। इसमें दीपदान, श्रीमहालक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, बही-खाता पूजन, धर्म एवं गृहस्थलों पर दीप प्रज्वलित करना, ब्राह्मणों एवं आश्रितों को भेंट देना तथा मिष्ठान आदि का वितरण शुभ माना जाता है।
निशीथ काल: निशीथ काल रात्रि 8.2 बजे से 10.38 बजे तक रहेगा। इसमें 8.43 बजे से 10.22 बजे तक लाभ की चौघड़िया है। इस अवधि में श्रीसूक्त पाठ, कनकधारा स्त्रोत एवं अन्य मंत्रों का जप अनुष्ठान करना उत्तम रहेगा।
महानिशीथ काल: रात्रि में 10.39 बजे से 1.14 बजे तक महानिशीथ काल रहेगा। इसमें अमृत की चौघड़िया भी रहेगी तथा 12.5 बजे से 2.19 बजे तक सिंह लग्न रहेगा। इसमें लक्ष्मी पूजन तो किया ही जा सकता है, साथ ही महाशक्ति काली उपासना तथा यंत्र-मंत्र-तंत्र आदि क्रियाओं के लिए यह समय उत्तम रहेगा।

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