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दीपावली कल्याणकारी प्रतीकों का पर्व है। दीपावली से जुड़ी प्रत्येक वस्तुओं का अपना महत्व है। इस पर्व का नाम आते ही दीपक, कमल, स्वास्तिक, लक्ष्मी-गणेश, ॐ, कलश, शुभ-लाभ आदि प्रतीकों का स्मरण अपने आप आ जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र इन प्रतीकों का अर्थ धर्मचक्र के साथ साझा कर रहे हैं।
दीपक:
दीपक प्रकाश का प्रतीक है। दीपक भले ही मरणशील मिट्टी का हो लेकिन फैलाता तो अमृतमयी प्रकाश ही है। इसकी अनुभूति से मन में फैले अंधकार का शमन हो जाता है। दीपक जीवन में उत्साह का संचार कर देता है। इसकी ज्योति शरीर में विद्यमान आत्मा का प्रतीक है और दीपक मिट्टी की क्षणभंगुर देह का द्योतक।
कमल:
कमल बुराइयों के बीच अच्छाई का प्रतीक है। कमल का पुष्प जहां लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए चढ़ाया जाता है, वहीं वह कीचड़ में खिलकर पापी संसार में रहकर भी निष्पाप बने रहने का संदेश भी देता है।
लक्ष्मी-गणेश:
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है। लक्ष्मी जी वैभव की प्रतीक हैं और गणेशजी निर्विघ्न शांति के। लक्ष्मी-गणेश का पूजन यह बताता है कि जहां शांति होती है वहीं लक्ष्मी भी रहती हैं। इस पूजन से यह प्रेरणा प्राप्त होती है कि घर-परिवार, कार्यस्थल, समाज, देश व सर्वत्र जहां तक हो सके शांति का वातावरण बनाए रखने की जरूरत है, ताकि लक्ष्मी अर्थात विकास की अनवरत प्रक्रिया चलती रहे।
स्वास्तिक:
स्वास्तिक कल्याण की ऊर्जा का प्रतीक है। यह देवताओं के आभा मंडल का चिन्ह होने के कारण देव समूह का भी प्रतीक है। इस पवित्र प्रतीक चिन्ह का प्रयोग प्रत्येक मांगलिक कार्य में अनिवार्य रूप से होता है। स्वास्तिक की चार भुजाओं में विराजमान देवताओं- इन्द्र, पूषा, वरुण व वृहस्पति से मानव जाति के कल्याण की प्रार्थना की जाती है। यह चिन्ह संदेश देता है सबके कल्याण की प्रार्थना करने, सबका मंगल करने का और ईर्ष्या द्वेष त्यागने का।
ॐ:
इसे घर, प्रतिष्ठान के द्वार पर स्वास्तिक के साथ बनाया जाता है। ब्रह्मा, विष्णु व महेश का प्रतीक इस प्रणवाक्षर के उच्चारण मात्र से सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होनी शुरू हो जाती है। यह संदेश देता है सदैव ऊर्जावान बने रहने का और सकारात्मक सोच रखने का।
कलश:
पानी से भरे, आम के पत्तों से सजे और अनाज से भरे ढक्कन वाले कलश पर नारियल रखकर लक्ष्मीजी के साथ इसका पूजन किया जाता है। इसमें आम का पत्ता प्रसन्नता व स्थिरता, जल से भरा कलश वैभव और अनाज से भरा ढक्कन धान्य का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि प्रसन्न व सन्मार्ग पर स्थिर रहने वालों के यहां धन-धान्य की कमी नहीं होती।
शुभ-लाभ:
दीपावली पर पूजा स्थल पर कुंकुम-रोली से शुभ-लाभ लिखा जाता है। यह शब्द प्रतीक है- सद्कार्य व सभी प्रकार का लाभ प्राप्त करने का। यह संदेश देता है कि शुभ कार्य करने से जो लाभ प्राप्त होता है वही स्थिर होता है। अशुभ कार्य से मिला लाभ चिंता एवं शोक प्रदायक होता है।
नारियल:
पानी से भरे नारियल को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। दीपावली सहित सभी मांगलिक पर्वों या कार्यां में नारियल का प्रयोग किया जाता है। नारियल का बाहरी आवरण जितना कठोर होता है अंदर से यह उतना ही नरम होता है। बाहरी आवरण अनुशासन व अंदर का नरम भाग मानव मात्र के प्रति दया व करुणा का प्रतीक है।

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  1. कितनी अच्छी जानकारी दी हमारे पर्वों के बारे में.... थैंक्स

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