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मनुष्य का भूत, भविष्य व वर्तमान जानने के लिए कई विधियां हैं जिनमें हस्तरेखा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जन्म कुण्डली का आधार तो जन्म समय होता है, जिसको निश्चिित करना एक कठिन प्रक्रिया है। लेकिन हस्तरेखा में ऐसा कुछ नहीं है। अपने भाग्य को जानने के लिए हस्तरेखा एक सुगम साधन है। इसके फलादेश में भी दो तरह की प्रक्रिया है। जन्म कुण्डली की भांति स्थायी रेखाएं और कुण्डली में गोचर की भांति तात्कालिक रेखाएं। स्थायी रेखाओं से जीवन के सभी महत्वपूर्ण आयामों पर हम विचार कर सकते हैं और यह पता लगाया जा सकता है कि जीवन की महत्वपूर्ण घटना कब और कैसे होगी। वहीं तात्कालिक रेखाएं तात्कालिक कर्मों को दर्शाती हैं। दोनों का विचार कर हस्तरेखा से भी भविष्यवाणी की जा सकती है। जीवन के सारे पहलुओं को जाना जा सकता है। पंचतत्व से निर्मित इस शरीर की सृष्टि के बारे में पांच अंगुलियों द्वारा पता लगाया जा सकता है। वहीं ग्रहों के जो पर्वत सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि आदि के नाम से बनाए गए हैं। इन पर्वतों पर कैसे चिन्ह बने हैं, वे आध्यात्मिक चिन्ह हैं या भौतिक चिन्ह, इससे भी फलादेश किया जाता है। हाथ में ऐसे चिन्ह बन जाते है जैसे मत्स्याकार, यव, शंख, चक्र, त्रिशूल व स्वास्तिक आदि। किस पर्वत पर कौन सा चिन्ह है, उसके अनुसार फलादेश किया जाता है। जैसे शुक्र पर्वत पर शुभ चिन्ह बने हों तो वह जातक भौतिक सुख के साथ ही अध्यात्म में भी गहरी पैठ रखेगा। अगर वह शिव का भक्त है और स्थूल त्रिशुल दिख रहा है तो उसे शिवलोक की प्राप्ति होगी। यही शुभ चिन्ह यदि गुरु पर्वत पर है तो इसका फल बदल जाता है। इस तरह के जातक भौतिक सुखों को नजरअंदाज करते हुए बाल्यकाल से ही आध्यात्मिक जीवन जीते हैं। कई शुभ चिन्ह- शंख, चक्र, त्रिशूल आदि यदि गुरु पर्वत पर मिलें तो प्रवज्या का योग बनता है अर्थात वह घर त्याग देता है। इस प्रकार हस्तरेखाओं का सूक्ष्म अध्ययन करने के लिए ग्रह पर्वतों के साथ स्थूल रेखाओं को जानना, शुभ-अशुभ चिन्हों को जानना चाहिए। रेखाओं की लम्बाई के अनुसार कितनी दूरी पर चिन्ह बन रहे हैं, आदि के आधार पर समय का निर्धारण कर सबकुछ जाना जा सकता है। जिस प्रकार जन्म कुण्डली में दशाएं बदलती रहती हैं लेकिन ग्रह नहीं बदलते हैं, ठीक उसी प्रकार स्थायी स्थूल रेखाएं नहीं बदलतीं, सूक्ष्म रेखाओं में परितवर्तन होता रहता है। इन सूक्ष्म रेखाओं के आधार पर हम समय का निर्धारण और क्या होने वाला है, इसे जान लेते हैं। इसके सम्यक ज्ञान से मानव जीवन को सुखी बनाया जा सकता है।
आचार्य धनेश मणि त्रिपाठी

keyword: hastrekha, palmistry


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  1. आपकी प्रस्तुति अच्छी लगी। मेरे नए पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी। नव वर्ष 2013 की अग्रिम शुभकामनाओं के साथ। धन्यवाद सहित।

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