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इसाई धर्म के संस्थापक प्रभु मसीह थे। उनका जन्म फिलिस्तीन में हुआ था। प्रभु यीशु मसीह ने कुष्ठ रोगियों की सेवा की और अपने अनुयायियों को प्रेम व सेवा का संदेश दिया। उनमें करुणा की भावना कूट-कूट कर भरी थी। उनके द्वारा चलाए गए धर्म को ईसाई धर्म कहा जाता है। बाइबिल इस धर्म का पवित्र ग्रंथ है। प्रभु यीशु मसीह के जन्म से ही ईसवी सन् प्रारंभ होता है। 25 दिसम्बर को उनके जन्म दिन को क्रिसमस डे के रूप में मनाया जाता है। 24 दिसम्बर की रात 11 बजे से ही गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं।
ईसाई धर्म की शिक्षाएं
ईश्वर एक है, उसमें विश्वास रखना चाहिए। ईश्वर के प्रति समर्पण कर चारित्रिक गुणों का विकास करना चाहिए। जन सेवा व जनकल्याण के लिए मनुष्य को अपना जीवन लगा देना चाहिए। सेवा, प्रेम व परोपकार अमूल्य धरोहर है, यह धरोहर जिसके पास है उसके लिए प्रभु के राज्य में जगह है। दुखियों की सेवा सच्ची ईश्वर सेवा है। क्रोध व ईर्ष्या जैसे दुर्गुणों को छोड़ देना चाहिए। यह भावना सच्चे मानव के निर्माण में सहायक होती है। मनुष्य प्रेम ही ईश्वर प्रेम है और मनुष्य की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। शुद्ध हृदय से प्रायश्चित करने पर ईश्वर पापी को भी क्षमा कर देता है।

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