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स्वतंत्र भारत के 66वें वर्ष की वर्ष कुण्डली में भारत धनु राशि में प्रवेश कर चुका है। वर्ष लग्न का स्वामी ग्रह गुरु छठें भाव में शत्रु राशि शुक्र के घर में केतु के साथ बैठा है। इसलिए ग्रह स्थिति के अनुसार 15 अगस्त 2012 में ही भारत सरकार तथा सामान्य प्रजा के लिए गंभीर चुनौतियों एवं समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। द्वितीयेश (आर्थिक एवं व्यापारिक स्थिति का स्वामी) शनि लाभ भाव मंगलयुक्त मुंथा के साथ है। फलस्वरूप व्यापारिक क्षेत्रों में बढ़ता हुआ मुद्रा बाजार, तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या, दैनिक उपयोग की वस्तुओं के मूल्यों में अत्यधिक वृद्धि का योग मिल रहा है। देश में दिन-प्रतिदिन बढ़ता भ्रष्टाचार, बेईमानी, कानून व व्यवस्था की समस्या, बेरोजगारी, दुर्भिक्ष और अनेक राज्यों में बिजली व पेयजल का संकट उत्पन्न हो सकता है। भारत की कुण्डली में कालसर्प योग चल रहा है और व्यय स्थान पर राहु है। इसलिए सरकारी (शासन में बैठे व्यक्तियों) की अदूरदर्शिता के कारण अनेक योजनाओं में अनाप-शनाप, बेतुके ढंग से धन खर्च किए जाने की संभावना है जिसका लाभ आम आदमी को कम प्राप्त होगा।

विदेशी पूंजी निवेश में न्यूनता का योग अगस्त 2012 से चल रहा है परन्तु धन का स्वामी ग्रह लाभ भाव में बैठा है, इसलिए यह उत्पादन को पूर्ववत रखेगा। लौह से संबंधित मशीनरी इत्यादि का अच्छा-खासा उत्पादन तो होगा लेकिन मूल्यों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। उपभोक्ताओं की संख्या में उत्पादन की तुलना में न्यूनता का योग रहेगा। व्यापार का कारक ग्रह बुध है। यह अष्टम भाव में स्थित होकर धन भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। इसलिए अगस्त 2013 तक व्यापारियों के लिए समय सुखद रहेगा। परन्तु लग्नेश गुरु का त्रिक भाव (छठें भाव) में स्थिति आर्थिक दृष्टि से देश की दुर्दशा की ओर संकेत कर रही है। अन्न व दैनिक उपयोग की वस्तुओं में तेजी का रुख बना रहेगा।
गणतंत्र दिवस की वर्ष कुण्डली के अनुसार 26 जनवरी 2013 के 64वें वर्ष की वर्ष कुण्डली में भारतवर्ष वृष लग्न में प्रवेश करेगा। वर्ष लग्नेश शुक्र अष्टम भाव (आकस्मिक विपत्ति या दुर्घटना भाव) शत्रु धनु भाव में है। अष्टमेश गुरु लग्न में स्थित होने से विपर्यय योग बन रहा है। अष्टमस्थ शुक्र की विशेष दृष्टि मुन्था पर है और मुन्था भाव का स्वामी भाग्य भाव में है तथा भाग्य भाव पर बुधादित्य योग है। अत: वर्ष का पूर्वार्द्ध भाग पूर्ववत चलेगा। दैनिक उपयोग की वस्तुओं में उत्तरोत्तर मूल्यवृद्धि का योग मिलेगा और जीवनोपयोगी आवश्यक वस्तुओं की कमी हो सकती है। भ्रष्टाचार में न्यूनता के योग कम मिलेंगे। नीति भाव का स्थायी कारक ग्रह गुरु शत्रु की राशि में होने से मई के अंत तक केन्द्र सरकार महंगाई रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाएगी, ऐसी संभावना नहीं है। 31 मई को गुरु जब मिथुन राशिगत हो जाएगा तो कुछ सुधार प्रारंभ होंगे। जून 13 के बाद महंगाई पर नियंत्रण संभव है। वर्ष का उत्तरार्ध पूर्वार्द्ध के छह माह की अपेक्षा कुछ राहत देने वाला होगा। विदेशी पूंजी निवेश का स्वामी ग्रह मंगल केन्द्र में है और अपने स्थान से लाभ भाव में है। इसलिए विदेशी पूंजी निवेश और विदेशी पूंजी भंडार में वृद्धि हो सकती है।

10 अप्रैल 2013 से पराभव नाम का संवतसर चलेगा। दिन बुधवार, रेवती नक्षत्र व वैधृतिकालीन योग में भारतीय नववर्ष प्रारंभ हो रहा है। ग्रहों की आकाशीय कौंसिल (ग्रह परिषद) के दस अधिकारों में से 6 अधिकार शुभ ग्रहों को और 4 अधिकार क्रूर ग्रहों को प्राप्त होगा। राजा का प्रमुख अधिकार देवगुरु वृहस्पति को प्राप्त है जबकि मंत्री पद क्रूर ग्रह शनि को मिलेगा। फलस्वरूप पश्चिमी देशों से भारत को लाभ होगा क्योंकि शनि पश्चिम दिशा का कारक ग्रह है। पश्चिमी देश अनेक प्रकार से भारत सहित पूर्वी देशों को आर्थिक सहायता देंगे। संपूर्ण विश्व में लोहा, स्टील, जस्ता, चांदी, लकड़ी, तांबा, गेहूं, दालें, घी, तेल, पेट्रोलियम पदार्थ, विल्डिंग मैटेरियल व कल-पुर्जों का उत्पादन व विक्रय बढ़ेगा और लोग लाभान्वित होंगे। विश्व लग्न कुण्डली में लाभ स्थान का स्वामी ग्रह शुक्र अपनी पूर्ण दृष्टि से लाभ स्थान को देख रहा है। इसलिए विश्व में मंदी का योग धीरे-धीरे समाप्त होगा। शेयर बाजार में विगत वर्ष की अपेक्षा उतार-चढ़ाव कम रहेगा।

ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र
तारामंडल, देवरिया बाईपास, गोरखपुर

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