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ज्योतिष शास्त्र अपने आप में विशिष्ट विज्ञान है। सृष्टि के कल्याण के लिए ब्रह्माजी ने इस रहस्य को प्रकाशित किया। इस ज्ञान को जानने वालों को दैवज्ञ कहा जाता है। इस विद्या से समस्याओं का समाधान कर जीवन को आनंदित किया जा सकता है। इसका जिक्र वेद-पुराणों में कई स्थानों पर आता है। पुराणों में राशि-नक्षत्रों की चर्चा करते हुए कई उपदेश व भविष्यवाणियां की गई हैं। सनातन धर्म में सभी मुख्यत: 16 संस्कार ज्योतिष विद्या के आधार पर ही संपन्न होते हैं जिनमें विवाह मुख्य है। ज्योतिष के द्वारा विवाह में आत्मिक मिलन की मैत्री और दाम्पत्य सुख भोगते हुए मोक्ष की कामना की गई है।
भारत देश जब आजाद हुआ तो 14 अगस्त 47 को पाकिस्तान ने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी जबकि भारत को ज्योतिष शास्त्र के आधार पर गुरु पुष्य योग के साथ वृष लग्न की प्रतीक्षा करनी पड़ी। इसलिए इन योगों के मिलने पर भारत ने 15 अगस्त 47 को स्वतंत्रता की घोषणा की। इन योगों के कारण ही भारत की संप्रभुता, अखंडता के साथ ही यहां धार्मिकता भी विद्यमान है। पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया जिसके कारण उसका विखंडन हो गया और उससे एक भू-भाग कटकर नया देश बंग्लादेश बन गया तथा वहां आज भी अशांति बनी रहती है।
ज्योतिष का मूल उद्देश्य है सर्वे भवन्तु सुखिन:। इस ज्ञान से आने वाली किसी भी समस्या की बाबत पता लगाया जा सकता है और उसका निदान ढूढ़ा जा सकता है और जीवन को आनंदित किया जा सकता है।

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