0
खरमास 16 दिसम्बर से शुरू हो रहा है और 14 जनवरी को समाप्त होगा। इस अवधि में विवाहादि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। खरमास में सूर्य अपने गुरु वृहस्पति के घर धनु व मीन में प्रवेश करता है। एक-एक घर में वह एक-एक माह रहता है। इसलिए वर्ष में दो बार धनु व मीन की संक्रांति में खरमास लगता है। खरमास में विवाहादि मांगलिक क्यों नहीं होते। इसके बारे में ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र ने कहा कि इस बारे में कई मान्यताएं हैं। प्रथम मान्यता के अनुसार सूर्य अपने तेज को अपने गुरु घर में पहुंचते ही समेट लेता है। अपने प्रभाव को छिपा लेता है और गुरु को साष्टांग नमन कर प्रभावहीन हो जाता है। ऊर्जा के देवता के प्रभावहीन हो जाने पर समस्त शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं, क्योंकि किसी भी कार्य में ऊर्जा की जरूरत होती है। द्वितीय मान्यता के अनुसार सूर्य के प्रवेश से उस राशि का तेज समाप्त हो जाता है। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि गुरु अस्त हो जाता है। सवाल उठता है कि यदि गुरु अस्त हो जाता है तो पंचांगों में मीन की संक्रांति के समय यज्ञोपवीत की संस्तुति क्यों दी जाती है? शरदचंद्र मिश्र ने कहा कि गुरु अस्त नहीं होता है। शुभ कार्य के लिए त्रिबल - सूर्य बल, चंद्र बल व गुरु बल के शुद्धि की आवश्यकता होती है। खरमासों में दो की ही शुद्धि प्राप्त होती है। इसलिए विवाहादि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

keyword: kharmas

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top