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‘वैसे ही बहुत देर हो चुकी है, अब और देर न करो, ध्यान में उतरो’। आधुनिक युग के चर्चित रहस्यदर्शी भगवानश्री रजनीश (ओशो) के ये शब्द संवेदना व करुणा की अतल गहराइयों से निकले हैं। समूची मानव जाति को स्वर्ग-नरक के साथ ही 33 करोड़ देवी-देवताओं के लोभ व भय से एक झटके में मुक्त कर अंतर्यात्रा के मूल पथ ध्यान की ओर ओशो ने इशारा किया। इस अर्थ में भी ओशो महत्वपूर्ण हैं कि दुनिया के सारे धर्मग्रंथों व संतों में जो भी श्रेष्ठ था और उस पर धूल जम चुकी थी, उन्होंने उस धूल को झाड़ा-पोछा और स्वच्छ-साफ सुथरी छवि के साथ समाज के सामने रखा।
ओशो का भौतिक शरीर इस जगत में 11 दिसम्बर 1939 को आया था। उनकी समाधि पर लगे पत्थर पर खुदा है- ओशो नेवर बार्न, नेवर डेड, वनली विजिटेड द प्लेनेट अर्थ दिसम्बर 11- 1931- जनवरी 19- 1990। अर्थात ओशो ने न तो जन्म लिया और न ही उनकी मृत्यु हुई। उन्होंने 11 दिसम्बर 1931 से 19 जनवरी 1990 तक पृथ्वी पर विचरण किया।
ओशो सत्य के साथ खड़े थे और लोगों को सत्य के साथ खड़े रहने का संदेश भी दे रहे थे। झूठ के पक्षधर लोगों को उनका संदेश रास नहीं आया और वे उनके खिलाफ भ्रामक प्रचार किए। जैसा बुद्ध के साथ हुआ। यदि बुद्ध की ऊर्जा आम जनता तक पहुंचती तो धर्म के धंधे का क्या होता? यह डर धंधेबाजों को व्यथित कर दिया और कहानियां गढ़कर और तलवार के बल पर बुद्ध के सत्य की धार कुंद करने का प्रयास किया गया। यही ओशो के साथ भी हुआ।
गोस्वामी तुलसीदास की पंक्ति- बूंद अघात सहैं गिरि कैसे। खल के वचन संत सह जैसे। को चरितार्थ करते हुए ओशो ने अपना अभियान जारी रखा। उनका मूल संदेश था- ध्यान में उतर जाओ। ध्यान ही समस्त समस्याओं की कुंजी है। अपने संन्यासियों को भी उन्होंने यही संदेश दिया कि ध्यान की सुगंध जहां तक हो सके पहुंचाओ। उन्होंने न तो जनता को कोई भय दिया कि यह नहीं करोगे तो पाप लगेगा या नष्ट हो जाओगे, बल्कि अपने अकाट्य तर्कों द्वारा उसे अपराध बोध से मुक्त किया। न ही कोई लोभ दिया कि ऐसा करोगे तो पैसे बढ़ेंगे, मुकदमे जीतोगो, पुत्र प्राप्ति होगी, बीमारी ठीक होगी इत्यादि, बल्कि उन्होंने कहा कि परमात्मा से कम पर राजी हो तो कहीं और चले जाओ। मनुष्य को उसके मूल से जोड़ने में वह जीवन भर लगे रहे। उनका एक ही प्रयास था कि मनुष्य अपनी गरिमा में खिल सके। मनुष्य जितना सुन्दर होगा, समाज उतना ही सुन्दर होगा। पूरे जीवन भर उन्होंने मनुष्य की चेतना पर कार्य किया।

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  1. Osho's arrival on this planet is the sunrise for humanity in modern times!
    Happy Master's Birthday to all followers and friends!!
    Thank you Gajdhar for this post:)

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gajadhardwivedi@gmail.com

 
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