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पारसी धर्म संस्थापक महात्मा जरथुस्त्र थे। इस धर्म का उदय पारस में ईसा से 700 वर्ष पूर्व हुआ था। पारसी लोग अग्नि की उपासना करते हैं। इन लोगों के धर्म ग्रंथ का नाम अवेस्ता-ए-जेंद है।
प्रमुख शिक्षाएं- ईश्वर एक और सर्वशक्तिमान है। शरीर नश्वर है और आत्मा अजर-अमर है, इसलिए मनुष्य को अच्छे कार्य करने चाहिए। पारसी धर्म स्वर्ग-नरक में विश्वास करता है। इस धर्म के अनुसार अच्छे कार्यों से मनुष्य को स्वर्ग मिलता है। पारसी धर्म अंधविश्वासों का कठोर विरोधी है तथा चरित्र निर्माण पर बल देता है। यह धर्म सत्य के प्रति आस्थावान रहने का उपदेश देता है। यह धर्म सूर्य और अग्नि का उपासक है। पारसी धर्म मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करता है।

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