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शुभ ग्रहों के प्रभाव में वृद्धि और अनिष्ट ग्रहों के कुप्रभाव के निवारण हेतु उपयुक्त ग्रह रत्न धारण करना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। हर रत्न के अंदर एक खास अनुपात में पांच तत्वों और ग्रहों की ऊर्जा का सम्मिश्रण होता है। रत्न धारण करने से उस संबंधित ग्रह की हमारे शरीर में उग्र या कम ऊर्जा संतुलित हो जाती है। परिणामस्वरूप हमें संबंधित ग्रह के कष्टों से कुछ हद तक मुक्ति मिल जाती है। मुख्य रूप से मूल्यवान रत्न नौ प्रकार के हैं। नीचे नौ ग्रहों से संबंधित नौ रत्नों के नाम दिए जा रहे हैं।
सूर्य- माणिक्य, चंद्र- मोती, मंगल-मूंगा, बुध-पन्ना, वृहस्पति-पुखराज, शुक्र-हीरा, शनि- नीलम, राहु-गोमेद, केतु-लहसुनिया
ग्रहों के अनुसार ये रत्नधारण किए जाते हैं। हमारे विचारों में इतनी शक्ति होती है कि वे हकीकत में प्रगट हो सकते हैं। सच्ची श्रद्धा व भावना से यदि रत्न पहने जाएं तो इच्छापूर्ति अवश्य होती है। यह भी देखा गया है कि रत्न आमतौर पर साधारण व्यक्तियों के पास नहीं होते, कई बार यद्यपि वे उसको प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं लेकिन उन्हें धारण कर पाने में असफल ही रहते हैं। व्यक्ति के लिए रत्नों का चुनाव एक कठिन कार्य होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह विश्वसनीय मित्र से ही रत्नों को खरीदें। बढ़िया रत्नों का प्रभाव अवश्य होता है लेकिन सस्ते व नकली रत्नों का प्रभाव बिल्कुल नहीं होता अपितु उससे हानि का अनुमान रहता है।
आचार्य पवन शास्‍त्री

keyword: ratna, jyotish

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