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राहु-शनि की जुगलबन्दी से विश्व में भारी तबाही के संकेत मिल रहे हैं। जिसको लेकर ज्योतिष के पंडित खासे चिंतित हैं। 23 दिसम्बर को राहु वृश्चिक राशि को त्यागकर पिछली राशि तुला में प्रवेश कर रहा है जहां शनि पहले से मौजूद है और मजबूत स्‍थित में हैा ये दोनों ग्रह मित्र हैंा इन दोनों का मिलना 1965 में हुआ था तो इस संयोग के चलते अमेरिका को दासता के बन्धन से मुक्त कराने वाले अब्राहम लिंकन की हत्या हुई थी। इन दोनों ग्रहों की युति के कारण दुनिया में क्रूरता और भ्रष्टाचार के बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

ज्योतिषाचार्य पं. शरदचन्द्र मिश्र के अनुसार 23 दिसम्बर को सायंकाल 6 बजकर 39 मिनट पर राहु तुला में प्रवेश करेगा। राहु को सिंह का पुत्र होने के कारण पश्चिम का ड्रैगन हेड भी कहा जाता है। यह एक दैत्य ग्रह है जो कटाव के कारण दो भागों में विभक्त होता है। पुराणों में इसे अमृत पान करने के चलते अमर माना जाता है। इससे आकास्मिक घटनाओं और त्वरित परिवर्तन का कारक माना जाता है। यह सर्वदा उल्टी चाल से गमन करता है। सूर्य और चन्द्र ग्रहण के समय ही यह सामने आता है। राहु अपने स्थान से 5,7,9 वीं स्थान को देखता है। यह उत्तर दिशा का त्याग कर पश्चिम दिशा में उल्टी गति से गमन करेगा और अपने परम मित्र शनि से मिल कर विश्व में हलचल को जन्म देगा। आज से 147 वर्ष पहले सन 1865 को यह तुला राशि में मित्र शनि के साथ रहा है। उसी वर्ष विश्व के महानायक और दासों की मुक्ति का समर्थन करने वाले अब्राहम लिंकन की हत्या कर दी गई थी। तुला राशि और शनि ग्रह दोनों पश्चिम दिशा के कारक हैं और शनि को जब राहु का संयोग प्राप्त हो जाता है तो यह भारी विध्वंसात्मक परिवर्तन को जन्म देता है।

इस संयोग के चलते विश्व के अनेक भागों में आर्थिक, भौगोलिक और सामाजिक परिवर्तन पैदा होता है जो पर्यावरण को भी प्रभावित करता है। यह मानव मस्तिक को प्रभावित करके हत्या, लूट, भ्रष्टाचार, तस्करी तथा बलात्कार जैसी घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि करेगा। शनि और राहु का शक्तिशाली स्वरूप विश्व के लिए अनुकूल नहीं कहा जायेगा। ज्योतिषाचार्य पं. मिश्र ने बताया कि 1978-79 में सिंह राशि पर शनि और राहु की युति रही है और इसके पूर्व कई बार ये दोनों एक ही राशि पर रहे हैं परन्तु शनि उतना बलवान नहीं रहा। ऐसा मिलन दो सदी के बाद होने जा रहा है। इससे पश्चिमी समुद्रों में भयंकर विक्षोभ से तटीय देशों में चक्रवात के कारण तबाही मचेगी। राजनीतिक महापुरूषों के निधन के साथ युद्ध का भी माहौल बनेगा।
संतोष गुप्ता

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