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मनोवैज्ञानिकों के अनुसार स्वप्न मन के सोचने-विचारने की उपज है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मन का कारक ग्रह चंद्रमा है जो अन्य आठ ग्रहों की तुलना में तेजी से गति करता है। मन दिन भर मस्तिष्क में अनेक विकारों को जन्म देता है। फ्रायड के अनुसार मनुष्य के दो मस्तिष्क होते हैं- प्रथम चेतन व द्वितीय अचेतन। जब चेतन मस्तिष्क सुप्तावस्था में होता है तो अचेतन मस्तिष्क सक्रिय होता है। वैबस्तर के अनुसार सपने सोए हुए व्यक्ति के अचेतन मस्तिष्क में चेतनावस्था के दौरान घटित घटनाओं, देखी हुई आकृतियों, कल्पनाओं व विचारों का समेकित चित्रांकन होता है। भारतीय वैज्ञानिक व ऋषि-मुनियों के अनुसार स्वप्नों का आना ईश्वरीय शक्ति का वरदान है तथा निद्रा की चतुर्थ अवस्था या रात्रि के अंतिम प्रहर में आए स्वप्न व्यक्ति को भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास कराते हैं। मनुष्य एक रात में कई सपने देखता है। अधिकतर लोग केवल उन सपनों को याद रख पाते हैं जो सुबह के करीब देखते हैं। कुछ लोग यह दावा करते हैं कि वे स्वप्न देखते ही नहीं जबकि हकीकत यह है कि वे स्वप्नों को याद नहीं रख पाते। नींद की एक अन्य अवस्था जिसे नान रैपिड आई मूवमेंट कहते हैं, उसमें व्यक्ति कच्ची नींद लेता है। इसमें शरीर की मांसपेशियां आरामदायक स्थिति में रहती हैं तथा हृदय की धड़कन भी कम हो जाती है। नींद की चार अवस्थाओं में यह प्रथम अवस्था है। द्वितीय एवं तृतीय अवस्था में व्यक्ति गहरी नींद में पहुंच जाता है और शरीर का तापमान न्यून हो जाता है। चतुर्थ अवस्था में आंखें आगे-पीछे घूमती हैं, इसलिए इसे रैपिड आई मूवमेंट अर्थात रैम स्टेज कहते हैं। यह अवस्था नींद लगने के 90-120 मिनट बाद आती है। रैम स्टेज को डेल्टा स्लीप अवस्था भी कहते हैं। यह नींद की वह अवस्था है जिसमें स्वप्न सबसे अधिक आते हैं।
मनुष्य जब स्वप्न देखता है तो शरीर में कई तरह के परिवर्तन आते हैं जैसे ब्लडप्रेशर बढ़ जाता है, धड़कन तेज हो जाती है। श्वसन गति में भी परिवर्तन होता है। कमजोर हृदय वालों को स्वप्न देखने के दौरान मृत्यु का सामना भी करना पड़ जाता है। क्योंकि उनका दिल इस दौरान होने वाले असामान्य बदलाव को झेल नहीं पाता। नींद लगने के 30-90 मिनट बाद स्वप्न देखना प्रारंभ होता है। स्वप्न हमारे मस्तिष्क संतुलन को बनाए रखने में सहायता करते हैं। यदि हम स्वप्न नहीं देखें तो हमारा मस्तिष्क इतने विचारों से भर जाएगा कि हम सोचने-विचारने की क्षमता खो देंगे। इससे हमारा चित्त व स्वास्थ्य प्रभावित होगा। इसलिए स्वप्न देखना अच्छे स्वास्थ्य के लिए अति आवश्यक है। जिन व्यक्तियों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है वे अच्छे व शुभ स्वप्न देखते हैं। जिन्हें अशुभ, बुरे व डरावने स्वप्न आते हैं वे स्वस्थ तो रहते हैं लेकिन क्रोधी व गुस्सैल स्वभाव के होते हैं।
हमारे ऋषि-मुनियों के अलावा विश्व के अन्य देशों जैसे यूनान, मिस्र, चीन आदि ने सभ्‍यताओं के युग में स्वप्नों को भविष्य में होने वाली घटनाओं का दर्पण माना है। स्वप्न मानव जाति को प्रकृति की अनूठी देन हैं। स्वप्नों के विषय में विश्व के तकरीबन हर हिस्से में अनेक मान्यताएं प्रचलित हैं। दिन के स्वप्न महत्वहीन होते हैं अर्थात फलित नहीं होते। यदि एक रात में एक से अधिक स्वप्न आएं तो अंतिम स्वप्न ही फलित होता है। अंतिम स्वप्न यदि शुभ आ जाए तो उसके बाद सोना नहीं चाहिए। क्योंकि पुन: नींद लग गई तो अशुभ स्वप्न आ गया तो उसके फलित होने की संभावना ज्यादा होती है।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र

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