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जिस प्रकार अन्य विद्याएं शब्दों से जुड़ी हैं, उसी प्रकार अंक ज्योतिष अंकों का विज्ञान है। शब्द एवं अंक एक सिक्के के दो पहलू हैं जिन्हें एक-दूसरे से पृथक नहीं किया जा सकता। इन दोनों के बिना दैनिक जीवन का कार्य अधूरा है। अंकों के बिना ज्योतिष, यंत्र, मंत्र, तंत्र, ग्रहों व नक्षत्रों तथा राशियों की संख्या, जप मंत्र संख्या, शब्द संख्या, माला में मनकों की संख्या, मंत्र में शून्य, निश्चित आकृतियां एवं अंक तथा विभिन्न ज्योतिषीय गणनाएं, तिथि, दिनांक, माह, वर्ष आदि जो अंकों पर निर्भर हैं, महत्वहीन हो जाएंगे। अंक ज्योतिष में मूलांक का बड़ा ही महत्व है।
मूलांक- मूलांक शब्द मूल+अंक दो शब्दों से मिलकर बना है। इसका मूल आधार जन्म तारीख है। 1 तारीख से लेकर 31 तारीख के मध्य ही सभी का जन्म होता है। इन्हीं तिथियों के आधार पर मूलांक तय होता है। 1, 10, 19, 28 तारीख में जन्म लेने वालों का मूलांक 1 है। स्वामी ग्रह सूर्य है। 2, 11, 20, 29 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 2 है और स्वामी ग्रह चंद्रमा है। 3, 12, 21, 30 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 3 है और स्वामी ग्रह गुरु है। 4, 13, 22, 31 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 4 है और स्वामी ग्रह राहु है। 5, 14 व 23 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 5 है और स्वामी ग्रह बुध है। 6, 15 व 24 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 6 है और स्वामी ग्रह शुक्र है। 7, 16 व 25 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 7 है व स्वामी ग्रह केतु है। 8, 17 व 26 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 8 है और स्वामी ग्रह शनि है। 9, 18 व 27 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 9 है और स्वामी ग्रह मंगल है। विश्व में जितने भी व्यक्तियों का जन्म हुआ है, वे नौ मूलांकों के अंतर्गत ही आते हैं चाहे जन्म किसी भी माह में क्यों न हो। आगे भी जन्म लेने वाले इन्हीं नौ मूलांकों के अंतर्गत आएंगे।
भाग्यांक- इसे संयुक्तांक भी कहते हैं। भाग्यांक का मूल आधार जन्मतिथि है जो जन्म तारीख, जन्म मास और जन्म वर्ष के अंकों का योग कर निकाला जाता है। अर्थात भाग्यांक = जन्मतिथि (मूलांक) + जन्म मास + जन्म वर्ष। व्यक्ति के जीवन में मूलांक से ज्यादा भाग्यांक प्रभावी होता है। इससे व्यक्ति के चरित्र, स्वभाव, भाग्य, उन्नति व अवनति के बारे में पता लगाया जा सकता है।
नामांक- नामांक का अर्थ व्यक्ति के नाम विशेष से होता है। एक व्यक्ति का श्रेष्ठ नाम ही उसकी श्रेष्ठता को दर्शाता है। व्यक्ति के नाम (नाम संस्कार) का उसके जीवन, क्रिया-कलाप व चरित्र आदि पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए व्यक्ति को श्रेष्ठ व शुभ नाम का चयन करना चाहिए। व्यक्ति के भाग्यांक के साथ ही व्यक्ति के नाम के ‘वर्णों’ को भी महत्वपूर्ण माना गया है। प्रत्येक वर्ण के अपने-अपने अंक निर्धारित होते हैं, उनके योग से व्यक्ति का नामांक निर्धारित होता है जो मुख्यत: तीन पद्धतियों में प्रचलित है- कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति व पाइथागोरस पद्धति। इन तीनों पद्धतियों में कीरो की पद्धति को प्राथमिकता देकर प्रभावशाली माना जाता है। जो वर्तमान में देश-विदेश में काफी प्रचलित है।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र
keyword: ank jyotish

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