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जिनका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को किसी भी माह में हुआ है उनका मूलांक 1 है। अंक 1 पर सूर्य का आधिपत्य है। ग्रहों में जिस प्रकार सूर्य अग्रणी, दैदीप्यमान, ग्रहराज व ग्रहाधिपति हे, उसी प्रकार मूलांक 1 के व्यक्ति घर-गृहस्थी में, व्यावसायिक प्रतिष्ठान में, नौकरी, सामाजिक व धार्मिक क्षेत्रों में नेतृत्व करने वाले होते हैं। अति महत्वाकांक्षी, आकर्षक व सुन्दर, स्वकार्य में दक्ष, कार्य पटु, विचार प्रधान, त्वरित और सही निर्णय लेने में दक्ष, सतत क्रियाशील, कर्मप्रधान, अपने आदर्शों का निर्वाह करने वाले, बात के धनी, स्वनिर्णय पर अडिग एवं सैद्धान्तिक होते हैं।
विवेचना- स्वामी ग्रह सूर्य। विशेष प्रभावी- 21 जुलाई से 28 अगस्त के मध्य। शुभ तारीखें- 1, 10, 19, 28। सहायक तारीखें- 2, 11, 20, 29 एवं 4, 13, 22, 31 तथा 7, 16, 25। सहायक शुभ वर्ष- 2, 11, 20, 29, 38, 47, 56, 65, 74 एवं 4, 13, 22, 31, 40, 49, 58, 67 तथा 7, 16, 25, 34, 43, 52, 61, 70। सर्वोत्तम वर्ष- 1, 10, 19, 28, 37, 46, 56, 64, 73। उत्तम दिन- रविवार, सोमवार। शुभ रंग- हरा, भूरा, पीला, सुनहरा। शुभ रत्न- माणिक्य। राशि- सिंह। धातु- स्वर्ण, तांबा, दिशा- पूर्व। मित्र अंक- 2, 7, 5। सम अंक- 3, 9, 4। शत्रु अंक- 6, 8। तत्व- अग्नि। रोग- हृदय की कमजोरी, रक्तदोष, रक्तचाप, स्नायु निर्बलता, नेत्र दोष। पाठ- आदित्य हृदय स्तोत्र। उपासना- सूर्य की। व्रत- रविवार। दान पदार्थ- माणिक्य, स्वर्ण, ताम्र, गुड़, घी, लाल वस्त्र, लाल पुष्प, रक्त चंदन एवं गाय। विवाह करना उत्तम- 14 जून से 15 जुलाई, 15 सितम्बर से 15 अक्टूबर, 15 नवम्बर से 18 दिसम्बर, 18 मार्च से 15 अप्रैल के मध्य जन्मे जातक से। व्यवसाय- आभूषण, जौहरी कार्य, स्वर्णकारिता, विद्युत, चिकित्सा, नेतृत्व, स्पोर्टस वस्तु, अग्नि, सेवा कार्य, सैन्य विभाग व प्रशासन। अनुकूल दिशा- उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, पश्चिम। प्रतिकूल दिशा- दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम। शुभ मास- जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर व दिसम्बर।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र

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