1
जिनका जन्म 3, 12, 21, 30 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 3 है। इनके जीवन का प्रतिनिधित्व देवगुरु वृहस्पति करते हैं। इनके जीवन पर धन, शिक्षा, आय, संतान का कारक बनकर गुरु वृहस्पति अधिकार जमाए रहते हैं। गुरु ग्रह की कृपा से इनके अंदर दैवीय गुणों का अम्बार होता है। ये घोर महत्वाकांक्षी होते हैं। उन्नति के शिखर पर पहुंचने की अभिलाषा संजोए रहते हैं। नेतृत्व के गुण विद्यमान होते हैं। सिद्धान्तवादी होते हैं। साहस, शक्ति, दृढ़ता, निर्मलता के धनी, सहिष्णुता के पक्षधर होते हैं। जाति, समाज, देश, सेना व राजनीति में ज्यादा सफल होते हैं।
विवेचना- स्वामी- देवगुरु वृहस्पति। विशेष प्रभावी- 19 फरवरी से 21 मार्च के मध्य उत्पन्न जातक। शुभ तिथियां- 3, 12, 21, 30। सहायक तिथियां- 6, 15, 24 एवं 9, 18, 27। शुभ वर्ष- 3, 12, 21, 30, 39, 48, 57, 66, 75। सहायक वर्ष- 6, 15, 24, 33, 42, 51, 60, 69 एवं 9, 18, 27, 36, 45, 54, 63, 72। शुभ दिन- गुरुवार, शुक्रवार, मंगलवार। श्रेष्ठ दिन- गुरुवार। शुभ रंग- पीला, चमकीला, गुलाबी, हल्का जामुनी। उन्नत समय- मार्च, जून, सितम्बर, 19 फरवरी से 20 मार्च व 20 नवम्बर से 21 दिसम्बर। निर्बल समय- 7, 16, 23 तिथियां व जनवरी, जुलाई माह। शुभ रत्न- पीला पुखराज। प्रभावित अंग- जंघा और उसके आसपास के अवयव। रोग- चर्मरोग, स्नायु दुर्बलता, गुप्त रोग, भोग से अरुचि, रक्त दोष, वायु प्रकोप, मधुमेह, ज्वर, खांसी। देव- विष्णु। व्रत-पूर्णिमा। दान- पुखराज, पीला कपड़ा, पुस्तक, चने की दाल, नींबू, नारंगी, कांस्य पात्र, शंख, चीनी, घी, हल्दी। विवाह संबंध- 15 दिसम्बर से 14 जनवरी, 15 मार्च से 14 अप्रैल, 15 नवम्बर से 14 दिसम्बर व 15 अप्रैल से 14 मई के मध्य उत्पन्न जातक से। व्यवसाय- वस्त्र, भोजनालय, धर्मोपदेश, लेखन, संपादन, कानूनी सलाहकार, व्याख्याता, वकील, क्लर्क, चिकित्सा कार्य, दलाली, आढ़त, विज्ञापन, अभिनय, जल जहाज कार्य, पुलिस विभाग, दार्शनिक, प्रबंधन व जलीय व्यापार। शुभ दिशा- दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, उत्तर- पश्चिम। अशुभ दिशा- ईशान कोण। धातु- सुवर्ण।

आचार्य शरदचंद्र मिश्र

keyword: ank-jyotish


नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top