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जिनका जन्म 6, 15, 24 तारीख को किसी महीने में हुआ है उनका मूलांक 6 है। इनके जीवन का प्रतिनिधित्व शुक्र ग्रह करता है। ये स्वाभिमानी, श्रृंगारप्रिय, सुरतिप्रिय, गंभीर, शांत, विश्वासपात्र, उदार और वफादारी से परिपूर्ण होते हैं। दाम्पत्य जीवन सामान्य मधुर रहता है। सदैव प्रसन्न रहने वाले, सुन्दर एवं सुन्दरता के पुजारी, स्वस्थ सुन्दर देह के धनी, पतले, वस्त्राभूषण प्रेमी, दीर्घायु, शक्तिमान और सम्मोहन करने में सिद्धहस्त होते हैं। अतिथि सत्कार में आगे रहते हैं। सांसारिक होते हुए भी चतुर नीतिवान होते हैं। कार्य करने से पहले हानि-लाभ, यश-अपयश, जय-पराजय, सुख-दु:ख, नीति-अनीति के बारे में खूब समझ रखने वाले होते हैं।
विवेचना- स्वामी ग्रह- शुक्र। शुभ तिथियां- 6, 15, 24। महत्वपूर्ण समय- 20 अप्रैल से 24 मई, 21 सितम्बर से 24 अक्टूबर। सहायक तिथियां- 3, 12, 21, 30 व 9, 18, 27। महत्वपूर्ण वर्ष- 6, 15, 24, 33, 42, 51, 60, 69। सहायक वर्ष- 3, 12, 21, 30, 39, 48, 57, 66, 75 तथा 9, 18, 27, 36, 45, 54, 63, 72वां वर्ष। निर्बल समय- अप्रैल, अक्टूबर, नवम्बर। शुभ दिन- शुक्रवार, मंगलवार, गुरुवार। सर्वाधिक शुभ - शुक्रवार। शुभ रंग- हल्का नीला, आसमानी, गहरा नीला, गुलाबी, चाकलेटी। अशुभ रंग- काला, लाल। शुभ रत्न- हीरा। शुभ धातु- सुवर्ण। रोग- फेफड़े संबंधी, धातु क्षीणता, मूत्र रोग, स्नायु निर्बलता, कफ, जुकाम, कब्जियत। देव- कार्तवीर्यार्जुन। स्त्री देव- संतोषी माता। दान पदार्थ- हीरा, स्वर्ण, चांदी, चावल, मिश्री, श्वेत वस्त्र, चंदन, सुगन्धित द्रव्य। विवाह संबंध- 15 फरवरी से 15 मार्च, 15 मई से 14 जून, 15 अक्टूबर से 18 नवम्बर व 15 अप्रैल से 14 मई के मध्य जन्मे जातको से। मित्र अंक- 2, 4, 9। शत्रु अंक- 1, 3, 5, 7, 8। व्यवसाय- होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, महाजनी कार्य, संगीत, वाद्य, लेखन, नाट्य, वस्त्र व्यवसाय, बागवानी, अभिनय, श्रृंगार प्रसाधन, रेशम, मिष्ठान, साहित्य, सार्वजनिक कार्य, समाज सेवा, यातायात इत्यादि। श्रेष्ठ दिशा- पश्चिम, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम। प्रतिकूल दिशा- दक्षिण पश्चिम।

आचार्य शरदचंद्र मिश्र

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