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सूर्य की 12 संक्रांतियां चार श्रेणियों में विभक्त हैं। मकर व कर्क संक्रांति अयन परिवर्तन के कारण अयन संक्रांति, मेष व तुला की विषुव संक्रांति, मिथुन, कन्या, मीन व धनु की षडशीति संक्रांति, वृष, सिंह, कुंभ व वृश्चिक की विष्णुपदी संक्रांति होती है। मकर संक्रांति अयन संक्रांति होने के कारण अत्यधिक महत्वपूर्ण है। सन 2013 से 2041 तक मकर संक्रांति का पुण्यकाल प्रति दो-दो वर्ष के अंतराल पर 14 या 15 जनवरी को रहेगा इसके पश्चात 2045 से 2085 तक पुण्यकाल एक-तीन वर्ष के अंतराल पर 14 या 15 जनवरी को रहेगा। इसके पश्चात वर्तमान 21वीं शताब्दी पूर्ण होते-होते हम मकर संक्रांति पूर्णतया 15 जनवरी को ही मनाने लगेंगे।
फल विशेष
मकर संक्रांति सोमवार को होने से यह ध्वांसी नाम की संक्रांति है। यह व्यापारियों को सुख देने वाली व व्यापार में वृद्धि करने वाली है। घनिष्ठा नक्षत्र में घटित होने के कारण महोदरी संक्रांति कही जाएगी। यह चोरों, अनैतिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए लाभप्रद होगी। यह संक्रांति दिन में हैं और द्वितीय तृतीयांश में है, इसलिए बुद्धिजीवियों और शिक्षा, कला, साहित्य, तकनीकी विद्या से जुड़े लोगों के लिए उत्तम रहेगी।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र

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  1. एक बेहतरीन लेख है मकर संक्राति के बार्यें में अधिक जाननें के लिए यहां पधारे बहुत अछा लिखा है किसी ने http://days.jagranjunction.com/2013/01/14/makar-sankranti-festival-in-india-%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5/

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