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मकर संक्रांति सूर्य भगवान का अतिप्रिय पर्व है। सूर्य साधना के लिए यह पर्व विशेष महत्वपूर्ण है। सूर्य साधना से ब्रह्मा, विष्णु, महेश इन तीनों की साधना का फल मिलता है। संक्षेप में कुछ उपाय इस प्रकार हैं-
1- मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तल अभ्‍यंग और स्नान करना चाहिए। लाल वस्त्र पहनकर व लाल आसन बिछाकर सूर्य साधना करें। ‘ऊं घृणि: सूर्याय नम:’ मंत्र का 28000 जप करें या कराएं तो सूर्य कृत एवं ग्रहकृत दोष समाप्त हो जाता है।
2- यदि हो सके तो ‘ऊं ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:’ का कुछ जप अवश्य करें।
3- कलश में या तांबे लोटे में जल भरकर उसमें लाल चंदन, अक्षत व लाल फूल डालकर दोनों हाथों को ऊंचा कर पूर्वाभिमुख होकर यह कहते हुए अर्घ्य प्रदान करें- ‘एहि सूर्य सहस्त्रासो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्तया गृहणार्ध्यं दिवाकर।।’
4-सूर्य से संबंधित स्तोत्र, कवच, सहस्रनाम, द्वादश नाम, सूर्य चालीसा आदि का पाठ हितकर माना जाता है।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र

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