0
सूर्य प्रत्येक माह में एक राशि पर भ्रमण करते हुए 12 महीने में सभी 12 राशियों पर भ्रमण कर लेते हैं। फलत: प्रत्येक मास की एक संक्रांति होती है। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इस संक्रमण को मकर संक्रांति कहा जाता है। इसका महत्व इसलिए अधिक है कि इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। उत्तरायण काल को ही प्राचीन ऋषि-मुनियों ने साधनाओं का सिद्धिकाल व पुण्यकाल माना है। यह देवताओं का प्रभात काल है तथा सूर्य की अगवानी का पर्व है। कर्क संक्रांति के समय सूर्य का रथ दक्षिण की ओर मुड़ जाता है। इसके विपरीत मकर संक्रांति के दिन सूर्य का रथ उत्तर की ओर मुड़ता है। अर्थात सूर्य का रथ उत्तरी गोलार्द्ध में रहने वालों की ओर मुड़ जाता है। सूर्य हमारी ओर आने लगते हैं। इससे बड़े उत्सव का अवसर कोई नहीं हो सकता। यह संक्रांति सूर्य उपासना का विशिष्ट पर्व है।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र
keyword: makar sankranti

नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top