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सृष्टि का आरंभ विषुवतीय लंका नगरी (मेरु) से माना जाता है। उसी दिन से वार, मास, अयन और वर्ष इत्यादि की गणना होती है- ‘लंकानगरर्यामुदयाञ्च भानोस्तस्थैव वारे प्रथमं वभूव। मधो: सितादेर्दिन मास वर्ष युगादिकानां युगपत्प्रवृत्ति:।।’ ज्योतिष सिद्धान्त में शनि, वृहस्पति, मंगल, सूर्य, बुध और चंद्रमा की कक्षा क्रमश: निम्नवत वर्णित है। अर्थात शनि की कक्षा सबसे ऊपर तथा चंद्रमा की कक्षा सबसे नीचे है। एक दिन में 24 होराएं होती हैं। इस प्रकार एक होरा का मान एक घंटे होता है। सूर्य सिद्धान्त के अनुसार- ‘मन्दादंध: क्रमेण स्युश्चतुर्था दिवसाधिया:’ के अनुसार शनि से चतुर्थ सूर्य की होरा होने से प्रथम वार सूर्य एवं सूर्य से चतुर्थ चंद्रमा की होरा होने से द्वितीय वार चंद्र होरा है। इसी प्रकार सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु व शनि की प्रवृत्ति हुई। इन सूर्यादि वारों को गुण और स्वभाव के अनुसार दो रूपों में विभक्त किया गया है। चंद्रमा, बुध, गुरु, शुक्र सौम्य संज्ञक एवं सूर्य, मंगल, शनि कू्रर संज्ञक होते हैं। सौम्य संज्ञक वारों में शुभ कार्य एवं कू्रर संज्ञक वारों में कठिन कार्य करना चाहिए।
रविवार-इस दिन पूर्व, उत्तर, आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) यात्रा ग्राह्य है। पश्चिम, वायव्य पश्चिम दिक्शूल है। विज्ञान, इंजीनियरिंग, सेना, उद्योग, बिजली, मेडिकल तथा प्रशासनिक शिक्षा संबंधी कार्यों का शुभारंभ उत्तम माना गया है। इसके अतिरिक्त व्यापार संबंधी कार्यों में राज्य प्रशासनिक कार्य, ज्वेलर्स, औषधि, शस्त्र, अग्नि, अनाज, सोना, ताम्बा, चांदी, गाय, बैल आदि का क्रय-विक्रय, मंत्रानुष्ठान और यज्ञादि कार्य शुभ माने जाते हैं।
सोमवार- यात्रा में शुभ दिशाएं पश्चिम, दक्षिण, वायव्य (उत्तर-पश्चिम) है। यात्रा में त्याज्य दिशा पूर्व, उत्तर, आग्नेय दिशा है। विद्या संबंधी कार्यों में लेखन कार्य, सौन्दर्य प्रसाधन, औषधि निर्माण व योजना संबंधी कार्य उत्तम। व्यापार संबंधी कार्यों में कृषि, गाय, भैंस, दूध, दही, डेयरी फार्म, औषधि, तरल पदार्थ, शंख, मोती, धन-संपदा, सौन्दर्य प्रसाधन, सुगधित पदार्थों का क्रय-विक्रय तथा पत्राचार के कार्य शुभ हैं।
मंगलवार- दक्षिण, पूर्व, पूर्व-दक्षिण दिशाएं यात्रा में शुभ । उत्तर-पश्चिम, उत्तर, पश्चिम दिशा त्याज्य। विद्या एवं शिक्षा संबंधी कार्यों में बिजली, सर्जरी, शस्त्र विद्या सीखना, भूगर्भ विज्ञान, दंत चिकित्सा का कार्य उत्तम। व्यापार संबंधी कार्यों में बिजली से संबंधित कार्य, बेकरी, स्पोर्टस, सोना, तांबा, मूंगा, पीतलादि का क्रय, भूमि, सर्जरी तथा रक्षा सामग्री आदि के कार्य शुभ ।
बुधवार- यात्रा में दक्षिण, पूर्व, नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) शुभ । उत्तर, पश्चिम, ईशान (पूर्व-उत्तर) दिशा त्याज्य। विद्या एवं शिक्षा संबंधी कार्यों में गणित, लेखनादि, बौद्धिक कार्य, बैंक, वकालत, तकनीकी, ज्योतिष, विज्ञान, वाहन चलाना आदि उत्तम। व्यापार संबंधी कार्यों में कृषि, व्यापारिक वस्तुओं का क्रय-विक्रय, शेयरों का क्रय-विक्रय, पुस्तक लेखन, प्रशासन, लेखाकार्य, शिक्षण, वकालत, शिल्प एवं संपादन कार्य, वाहन क्रय-विक्रय उत्तम।
गुरुवार- यात्रा में पूर्व, उत्तर, ईशान दिशा ग्राह्य। दक्षिण, पूर्व, नैऋत्य दिशा त्याज्य। विद्या एवं शिक्षा संबंधी कार्यों में दर्शन शास्त्र, धर्म, तंत्र, ज्योतिष, वकालत, वैद्यक कार्य उत्तम और व्यापार संबंधी कार्यों में धार्मिक अनुष्ठान, शिक्षा के कार्य, आभूषण, औषधि, वाहन, भूमि का लेन-देन, विदेश गमन शुभ।
शुक्रवार- यात्रा में पूर्व, उत्तर, ईशान दिशा ग्राह्य। पश्चिम, दक्षिण, नैऋत्य दिशा त्याज्य। विद्या एवं शिक्षा संबंधी कार्यों में नृत्य, वाद्य, गायन, कला, संगीत, अभिनय, गीत, काव्य रचना, सौन्दर्य संबंधी शिक्षा तथा व्यापार संबंधी कार्यों में संगीत, सिनेमा, आभूषण व खुशबूदार वस्तुओं का क्रय-विक्रय उत्तम।
शनिवार- पश्चिम, दक्षिण, नैऋत्य दिशा ग्राह्य। पूर्व, उत्तर व ईशान दिशा त्याज्य। विद्या एवं शिक्षा संबंधी कार्यों में तकनीकी, शिल्प, कला, मशीनरी व ज्ञान संबंधी अंग्रेजी भाषा, उर्दू, फारसी का ज्ञान प्रारंभ करना शुभ तथा व्यापार संबंधी कार्यों में मशीनरी, लोहा, लकड़ी, चमड़ा, सीमेंट, तेल, पेट्रोल, पत्थर, भूमि, ठेकेदारी, शस्त्रों का क्रय-विक्रय, आपरेशन कार्य, वाहन प्रयोग व विदेश यात्रा उत्तम।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजादनगर, रूस्‍तमपुर, गोरखपुर

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  1. Hi,

    Gyaan se bharpoor aur atyant sahayak. Dhanyawaad :) :) :)

    P.S. Do check out & vote for my entry for Get Published.

    Regards

    Jay
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  2. thanx gajadhar ji..
    kitne mahtaawpurn jankariya hein apke lekh mein...

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gajadhardwivedi@gmail.com

 
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