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पृथ्वी भी एक संपूर्ण ग्रह है। जो अपनी धुरी या अक्ष पर पश्चिम से पूर्व (घड़ी सूइयों के विपरीत) परिभ्रमण करती है। अर्थात अपने अक्ष पर गोल घूमकर 24 घंटे में उसी स्थान पर आ जाती है। इसी 24 घंटे में पृथ्वी की आधी गति दिन में व्यतीत होती है और आधी रात में। इन दोनों के बीच का समय मध्याह्न और मध्य रात्रि कहलाता है। सिद्धान्त ज्योतिष के अनुसार सूर्य एक स्थिर पिण्ड है और उसकी परिक्रमा अन्य ग्रहों की भांति पृथ्वी भी करती है। सूर्य की एक पूरी परिक्रमा यानी 360 अंश की यात्रा करने में पृथ्वी को लगभग 365 दिन 6 घंटे का समय लगता है। इस प्रकार 30 दिन में पृथ्वी एक राशि क्षेत्र को पार करती है, जिसे एक सौरमास कहते हैं। सौरमास का आरंभ 14 अप्रैल को वैशाखी से तय करते हैं, जब सूर्य को मेष राशि के शून्य अंश पर स्थित मान लिया जाता है। पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के साथ-साथ सूर्य का भी चक्कर लगाती है। पृथ्वी अपने जीव, वातावरण तथा वायुमंडल के कारण मनुष्य लोक जगत की संज्ञा से विभूषित होती है। परन्तु सूर्य आग का एक गोला मात्र है। अत: सुविधा के लिए सूर्य को भी एक ग्रह मान लिया जाता है जो गुरुत्वाकर्षण से सौर मंडल के सभी ग्रहों को बांधे हुए है। सूर्य की दैनिक गति 1 दिन में 1 अंश के करीब है, जिसके कारण 60 अंश की दूरी 365 दिन में पूरी होती है। इसको वार्षिक गति यानी वर्ष कहते हैं।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र


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