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एक मध्यम मान के अनुसार सौर दिवस 24 घंटे (60 घड़ी) में आंका गया है। परन्तु वास्तविक समय धरती को ठीक उसी बिन्दु पर पहुंचने में 23 घंटे 56 मिनट 5 सेकेंड लगता है। इस प्रकार हम प्रत्येक सौर दिन को 3 मिनट और 55 सेकेंड से अधिक लेते हैं। इस समय को हम 365 दिन के वर्ष में आंकते हैं। इसके अतिरिक्त 6 घंटे का समय प्रतिवर्ष बच जाता है। उसे चौथे साल में 6 गुणे 4= 24 घंटे, प्रति चौथे वर्ष 29 फरवरी में जोड़ देते हैं। इस प्रकार 360 सौर दिवसों को 365 दिन 6 घंटे के वर्ष मान के साथ समायोजित किया जाता है। जब हमार दिनमान 24 घंटे 3 मिनट 55 सेकेंड प्रतिदिन मध्यम समय के अनुसार चलता है तो इसको विभाजित करके 12 घंटे 2 मिनट का दिन और 12 घंटे 2 मिनट की रात मान ली जाती है। यदि 00-00 रात्रि के समय मान को दोपहर अर्थात मध्याह्न के सांपातिक काल में बदलना पड़े तो 12 घंटे 2 मिनट जोड़ना होगा, क्योंकि 24 घंटे में यह सांपातिक काल 32 मिनट 55 सेकेंड यानी 4 मिनट के करीब प्रतिदिन बढ़ता है। इस प्रकार 12 घंटे में इसकी वृद्धि मात्र 2 मिनट होती है। प्रत्येक पंचांग में सांपातिक काल के अनुसार विभिन्न अक्षांश रेखाओं पर पैदा हुए व्यक्तियों की जन्मकुण्डली बनाने के लिए लग्न निकालने की पद्धति का उल्लेख किया जाता है।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र
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