1
प्लेटो में ग्रीक दर्शन अपने उत्कर्ष पर पहुंचा है, इसलिए उसको पूर्ण ग्रीक की उपाधि दी गई है। इसके पूर्व समस्त ग्रीक दार्शनिकों का प्रभाव प्लेटो पर और प्लेटो का प्रभाव अपने परवर्ती पाश्चात्य दार्शनिकों पर पड़ा है। प्लेटो पूर्ण रूप से रहस्यवादी हैं। उनके लिए दर्शन जीवन का अंग है। दर्शन का लक्ष्य तत्व का निर्विकल्प साक्षात्कार है। आत्मा को हृदयानुभूति से ऊपर उठकर तर्क के सविकल्प स्तर पर होते हुए निर्विकल्प स्वानुभूति तक ले जाना दर्शन का मुख्य उद्देश्य है। प्लेटो का उद्देश्य असत से सत की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरत्व की ओर जाना है। यह साधना के द्वारा हो सकता है। तर्क तत्व की ओर संकेत करता है। तत्व का साक्षात्कार साधना का विषय है। इसीलिए प्लेटो ने गुरु-शिष्य के साक्षात संपर्क को बहुत महत्व दिया।
दार्शनिक का लक्ष्य शांतिमय साधना द्वारा निर्विकल्प अनुभूति प्राप्त करना है। इसके अतिरिक्त दार्शनिक का कार्य लोक संग्रह या लोक कल्याण भी करना है। असली लोक कल्याण तो सिद्ध व्यक्ति की स्थिति मात्र से होता है। फिर भी आवश्यकता होने पर सिद्ध निर्विकल्प भाव से सांसारिक क्षेत्र में भी उतरते हैं। जब तक ऐसे सिद्ध दार्शनिकों की प्रधानता नहीं होगी विश्व में शांति स्थापित नहीं हो सकती।
acharya sharadchandra mishra

keyword: western-philosophy, plato

नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा

नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा

Post a Comment

  1. Philosophy of plato as you have written here is very similar to Indian vadic philosiphy:

    असतो मा सद्गमय ।
    तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
    मृत्योर्मा अमृतं गमय ।

    ReplyDelete

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top