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प्लेटो ने अपनी महान कृतियां संवादों के रूप में लिखी हैं। दार्शनकि महत्व के साथ-साथ उनका साहित्यिक महत्व भी है। प्लेटो ने पचास वर्षों में अनेक संवादों की रचना की है। उनके रचनाकाल को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है।
प्रथम काल एकेडमी की स्थापना के पूर्व का है जिसमें एपोलोजी, क्राइस्टो, प्रोटेगोरस, जॉर्जियस, मेनो, फीडो और सिम्पोजियम नामक संवाद आते हैं। द्वितीय काल एकेडमी की स्थापना के तुरंत बाद का काल है जिसमें रिपब्लिक और फीड्रस नामक संवादों की रचना हुई। तृतीय काल प्लेटो के वार्द्धक्य का है जिसमें पार्मेनाइटीज, थीटीटस, सोफिस्ट, फिलेबस, टाइमियस और लॉज नामक संवादों की रचना हुई। इसके अतिरिक्त प्लेटों ने अपने असली सिद्धान्त अपने शिष्यों को उपदेश रूप में दिए जिनका उन्होंने प्रकाशन नहीं कराया।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र

keyword: western-philosophy, plato

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