1
लग्नेश स्वनवांश में हो या शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हो तो शरीर स्वस्थ होता है। लग्नेश लग्न में हो तो भी शरीर सुख होता है। लग्नेश पाप ग्रहों से युक्त होकर त्रिक स्थानों में हो तो शरीर सुख नहीं होता है। लग्न में पाप ग्रह हों व लग्नेश निर्बल हो तो भी शरीर का सुख नहीं होता है।
पतले शरीर के योग: निम्नलिखित योगों में जातक का शरीर पतला होता है-
शनि व चंद्रमा मेष राशि में स्थित हों
द्वादशेश लाभ या केन्द्र में हो तथा वह वक्री हो
लग्नेश जिस राशि में हो उस राशि का स्वामी त्रिक स्थानों में हो
शुष्क राशि लग्न में हो व वहां शुष्क प्रवृत्ति ग्रह भी हो
लग्नेश शुष्क ग्रह से युक्त हो
लग्न नवांशेश यदि शुष्क राशियों में हो
लग्न में पापी शुष्क ग्रह हो
सूर्य, मंगल, शनि निसर्गत: शुष्क ग्रह हैं। बुध व वृहस्पति यदि शुष्क राशिगत हों तो शुष्क माने जाएंगे अन्यथा वे सजल राशिगत होने पर आर्द्र माने जाते हैं। कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर (उत्तरार्ध), कुंभ व मीन ये सजल राशियां हैं। मेष, वृष, मिथुन, सिंह, कन्या व धनु शुष्क राशियां हैं
पुष्ट देह के योग: निम्नलिखित योगों में जातक का शरीर पुष्ट होता है-
लग्नेश व चंद्रराशीश परस्पर युति करते हों
लग्नेश जल राशि में शुभ ग्रहों के साथ हो सजल राशिगत लग्नेश पर जलीय ग्रहों की दृष्टि हो
लग्न में शुभ राशि हो तथा पापग्रहों की वहां पर दृष्टि न हो
लग्न वृहस्पति से युत या दृष्ट हो
लग्न में मिथुन नवांश हो अथवा लग्न में बलवान शुभ ग्रह स्थित हो
आचार्य पवन कुमार राम त्रिपाठी, प्रवक्‍ता श्री काशी विश्‍वेश्‍वर संस्‍कृत महाविद्यालय मुंबई

keyword: jyotish

नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top