0

डन्स स्काटस का दर्शन
डन्स स्काटस का जन्म स्काटलैण्ड में हुआ था। ये आक्सफोर्ड में पढ़े थे और कुछ समय तक वहां अध्यापक भी रहे। ये फ्रेन्सिस्कन शाखा के अनुयायी थे और संत एक्विनस के विरोधी थे। स्काटस ने तर्क और श्रुति के क्षेत्रों को अलग रखना ही युक्तिसंगत समझा। तर्क अतीन्द्रिय पदार्थों का कभी निश्चयात्मक ज्ञान नहीं कर सकता है। इसके अनुसार ईश्वर की सत्ता के लिए जो निश्चायत्मक प्रमाण एक्विनस ने दिए हैं वे निश्चायत्मक नहीं हैं। ईश्वर की सत्ता, आत्मा की अमरता, परमपिता की करुणा और सिद्धान्त धर्म के विरुद्ध है और श्रुति के कारण मान्य है। इसके बावजूद स्काटस ने ईश्वर की सत्ता के लिए प्रमाण दिया है। संत एन्सेल्म के सत्तामूलक तर्क को इन्होंने मान्य समझा। ईश्वर के विचार मात्र से उनकी सत्ता सिद्ध होती है। यदि ईश्वर की सत्ता न हो तो पूर्ण ईश्वर का विचार एक साथ संभव व असंभव दोनों हो जाता है, जो असंगत है, अर्थात ईश्वर की सत्ता है।


स्काटस के अनुसार एक्विनस का यह कथन कि ईश्वर का स्वरूप नित्य विज्ञानात्मक है और ये नित्य विज्ञान हमारे विज्ञानों और जड़ पदार्थों के वास्तविक धर्मों के मूल रूप हैं, अनुचित हैं। ईश्वर का स्वरूप उसकी स्वतंत्र इच्छा शक्ति या संकल्प शक्ति या कृति शक्ति है। यदि ईश्वर अपने नित्य विज्ञानों के अनुरूप सृष्टि का निर्माण करते हों तो वे नित्य विज्ञान, ईश्वर के आदर्श बनकर उनको परतंत्र बना देंगे। सामान्यों की सत्ता व्यक्तियों या विशेषों से भिन्न या श्रेष्ठ नहीं है। ईश्वर अपनी संकल्प शक्ति से व्यक्तियों को उनके सामान्यों के साथ उत्पन्न करते हैं। प्रत्येक स्वरूप- धर्म सामान्य रूप व व्यक्ति रूप दोनों है। ईश्वर के विज्ञान में और हमारे विज्ञान में वह सामान्य है और विशेषों में व्यक्ति रूप। जो विशेष है वह सामान्य का संकुचित रूप है। ईश्वर समान जीवों का स्वरूप भी उसकी संकल्प शक्ति है। हमारी स्वतंत्रता हमारे संकल्पों के कारण है। व्यक्ति धर्म के मार्ग को जानते हुए भी पाप के पथ पर चल सकता है, यही उसकी स्वतंत्रता है। हमारा ज्ञान संकल्पों के कारण बनता है। अत: हम अपने ज्ञान के लिए भी उतने उत्तरदायी हैं जितना अपने कर्मों के लिए।

आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

keyword: western philosophy

नोट- इस वेबसाइट की अधिकांश फोटो गुगल सर्च से ली गई है, यदि किसी फोटो पर किसी को आपत्ति है तो सूचित करें, वह फोटो हटा दी जाएगीा

Post a Comment

gajadhardwivedi@gmail.com

 
Top