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त्रिदिवसीय ओशो ध्यान शिविर का आयोजन 8, 9, 10 मार्च को गोकुल अतिथि भवन सिविल लाइन्स गोरखपुर में किया गया है। शिविर का उद्घाटन 7 मार्च को सायं 6 बजे होगा। उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि पूर्व मंडलायुक्त के. रविन्द्रनायक की धर्मपत्नी डॉ. हिमा बिन्दु नायक होंगी। शिविर का संचालन मां ध्यान आभा व स्वामी अंतर जगदीश करेंगे। शिविर में ओशो द्वारा प्रदत्त विभिन्न ध्यान प्रयोग कराए जाएंगे। शिविर में भाग लेने के इच्छुक लोग 7 मार्च को शिविर स्थल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। यह बातें डॉ. बलवान सिंह, उपाचार्य रक्षा अध्ययन विभाग महाविद्यालय भटवली बाजार ने कही। उन्होंने कहा कि ओशो एक ऐसे मनोवैज्ञानिक व दार्शनिक हैं जिन्होंने आधुनिक युग के मनुष्य की आंतरिक जटिल समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न ध्यान विधियों का अन्वेषण किया है। इस ध्यान शिविर में ओशो द्वारा प्रदत्त सक्रिय व निष्क्रिय दोनों प्रकार की ध्यान विधियों का प्रयोग कराया जाएगा जिनमें मुख्यत: सक्रिय ध्यान, नटराज ध्यान, कुण्डलिनी ध्यान, नादब्रह्म ध्यान व सूफी नृत्य ध्यान के साथ-ाथ प्रतिदिन सायं व्हाइट रोब ब्रदरहुड (संध्या सत्संग) होगा। उन्होंने कहा कि ध्यान रूपांतरण का वह विज्ञान है जिससे समाज की कुप्रवृत्तियों तथा विकृतियों को रूपांतरित किया जा सकता है। समाज में व्याप्त बुराइयों के अंधकार से लड़ना नहीं है बल्कि रोशनी लाने की व्यवस्था करनी है जो ध्यान से ही संभव है। ओशो ने कहा है कि ध्यान के दीयों को जलाओ और प्रेम के गीतों को गाओ। प्रेम के गीत और ध्यान के दीये, वह सुबह जो आज तक आदमी के जीवन में नहीं हुई, उसे पैदा करते हैं। आदमी ने बहुत तड़प लिया, नर्क में बहुत जी लिया है, इसलिए अब समय आ गया है कि हम स्वर्ग को पृथ्वी पर उतार लें। आदमी के जीवन में स्वर्ग उतरे, यही ध्यान शिविर का उद्देश्य है।

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