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10 अप्रैल 2013 से सिंह लग्न में नव विक्रम सम्वत् का शुभारंभ हो रहा है। वर्ष प्रवेश लग्न का स्वामी सूर्य अष्टम भाव में पंचग्रही युति में स्थित है। ज्योतिषों की मानें तो लग्नेश का अष्टम भाव में स्थित होना शुभ फलदायक नहीं है। उनका कहना है इस नव वर्ष में राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहेगा तथा वे संसदीय एवं नैतिक सीमाओं का उल्लंघन करेंगे। भ्रष्टाचार के भी बड़े मामले देखने को मिलेंगे।
नव विक्रम सम्वत् के शुभारंभ में बन रहे योग शुभ संकेत नहीं दे रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पं. शरद चन्द्र मिश्र कहते हैं कि अष्टम भाव में पंचग्रही युति अच्छी नहीं है। तृतीय भाव में शनि राहु की युति भी अनुकूल फलप्रद नहीं है। उन्होंने बताया कि इसके फलस्वरूप केन्द्र व राज्य स्तर पर अत्यधिक राजनीतिक उठा-पटक देखने को मिल सकती है। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ ही भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा। इसमें कई लोगों को सजा भी भुगतनी पड़ सकती है। इतना ही नहीं, इस नये वर्ष में अर्थव्यवस्था में भी सुधार के आसार नहीं दिख रहे हैं। पं. शरद ने बताया कि निर्यात में अपेक्षित वृद्धि दर न होने के कारण आर्थिक स्थिति में सुधार का क्रम मंद रहेगा। मुद्रास्फीति के साथ-साथ मंदी के पूरे आसार दिखाई दे रहे हैं। विदेशी मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपये को अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। इसकी वजह से आयात महंगा हो सकता है और विदेशी व्यापार घाटा बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, यह वर्ष कानून-व्यवस्था के लिए भी अच्छी नहीं है। अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने में सरकारें नाकाम रहेंगी और अपराध के ग्राफ में कमी आने के कम संकेत हैं। उनकी मानें तो महिलाओं के प्रति अपराध में भी किसी प्रकार की कमी दृष्टिगोचर नहीं हो रही है। यह वर्ष किसी भी सूरत में शुभ फलदायी नहीं है। इस वर्ष आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि का योग मिल सकता है। शनि-राहु की युति तथा सूर्य-मंगल से षडाष्टक योग महंगाई, दुर्घटना, जनहानि, बाढ़, मौसम में आकस्मिक परिवर्तन और सीमा पर संघर्ष एवं राजनीतिक अस्थिरता का द्योतक है। वहीं राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों का व्यवहार सामान्य लोगों के प्रति उपेक्षापूर्ण रहेगा तथा सामान्य लोगों में गहन असंतोष, क्रोध और विक्षोभ व्याप्त होगा। धान्येश सूर्य होने से सभी प्रकार के अनाजों के मूल्यों में वृद्धि होगी। रोगों में भी वृद्धि का योग मिलेगा। कृषि और धातुओं का अधिकार क्रूर ग्रह मंगल को मिला है। इसकी वजह से सावन में कुछ भागों में वर्षा की कमी हो सकती है। ग्रीष्म कालीन फसलों का उत्पादन सामान्य और धातुओं के मूल्य में वृद्धि का योग रहेगा।
पं. शरद कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि इस वर्ष सब कुछ बुरा ही होगा। इस वर्ष कृषि का उत्पादन और मौसमी फलों की पैदावार अच्छी होगी। इसके अलावा राजनेता एवं उच्चस्तरीय लोग भूमि, वाहन, धन सम्पदा आदि सुख साधनों से सम्पन्न होंगे। तकनीकी एवं शैक्षणिक क्षेत्रों में विशेष सुधार किये जायेंगे। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि देवगुरु बृहस्पति के राजा होने से धार्मिक-यौगिक एवं सांस्कृतिक समागम अधिक होगा। वहीं मंत्री शनि के कारण लोहा, स्टील, जस्ता, चांदी, लकड़ी, ताम्बा, गेहूं, दालें, घी, तेल, पेट्रोलियम सहित बिल्डिंग मैटीरियल चमड़ा, कलपुर्जा आदि से सम्बंधित व्यापारी विशेष रूप से लाभान्वित होंगे। पं. शरद चन्द्र मिश्र ने बताया कि इस वर्ष धन कोष का अधिकार चन्द्रमा के पास होने से धन-दौलत का विस्तार अधिक होगा। सुगन्धित तेल, दूध, घी, वस्त्रों, सौन्दर्य प्रसाधन का व्यापार करने वाले लाभ कमा सकते हैं। उनके अनुसार वर्षा, फल और सेना, ये तीनों अधिकार सौम्य ग्रह शुक्र को प्राप्त होने से समाज का आभिजात्य वर्ग धन सम्पदा और संसाधनों से सम्पन्न होगा। विभिन्न प्रकार के वृक्ष, फल, फूल और फलदार पौधे अधिक होंगे। इसके साथ ही बौद्धिक चेतना का भी विस्तार होगा।
स्‍वाती श्रीवास्‍तव

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