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पुरुष और पकृति के स्वरूप से परातीत होने पर भी पराशक्ति का समय-समय पर विश्व व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए अवतरण होता है। चैत्र शुक्ल नवमी की तिथि पराम्बा महाशक्ति के रूप विष्णु (राम) के अवतरण का दिन है। देवी पुराण के अनुसार पराम्बा ही जगत की सर्वेश्वरी और सृष्टि की मूलरूपा हैं। उन्हीं से त्रिदेवों की उत्पत्ति हुई- ‘पराम्बात् विष्णु: कृष्ण हृषीकेशो वासुदेवो जनार्दन:। उमा गौरी सती चण्डी सुन्दरी सुभगा शिवा अजायत्।।’ अर्थात उस महाशक्ति से जो पैदा हुए उसमें विष्णु, कृष्ण, हृषीकेश और वासुदेव (राम) भी हैं। शारदीय नवरात्र के बाद वासंतिक नवरात्र के महत्वपूर्ण होने का यही कारण है। शारदीय नवरात्र के अष्टमी के दिन महाशक्ति स्वयं अवतरित हुई थीं और वासंतिक नवरात्र के नवमी के दिन उनके पुरुष रूप का अवतरण हुआ। पुराणेतिहास में राम अवतार का बहुत महत्व है। जब महिषासुर, शुंभ-निशुंभ इत्यादि असुरों का पृथ्वी पर वर्चस्व स्थापित हो गया ते परातीत सत्ता (शक्ति) दुर्गा के रूप में अवतरित हुई और जब त्रेता में महिषासुर सदृश्य रावण आदि राक्षसों का वर्चस्व हुआ तो उस शक्ति को राम के रूप में अवतरित होना पड़ा। दोनों नवरात्र शक्ति के अवतरण का समय है।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

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