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पूर्णिमा का चंद्रमा मन को बहुत आनंद देता है। इसकी तुलना बिजली की सजावट से नहीं हो सकती। चंद्रमा की इसी विशेषता के कारण स्नेह के लिए उसे देखा जाता है। स्नेह के बारे में सोचते ही मां का चेहरा सामने आ जाता है, इसलिए चंद्रमा को मातृकारक कहा गया है, इसीलिए बच्चे उसे मामा कहते हैं। भूखा बच्चा जब मां की गोद में बैठकर स्तनपान करता है तब मां के मन से जो स्नेह भावना उभरती है, उसी स्नेह का कारक ग्रह है चंद्रमा। चंद्रमा सबसे गति वाला ग्रह है और उसकी गति में सर्वदा परिवर्तन होता है, इसलिए जहां गति से जुड़ी बातें आ जायं, वहां चंद्रमा महत्वपूर्ण हो जाता है। धरती पर सबसे अधिक गति होती है मन की। पल भर में गति बदलने वाला मन चंद्रमा से भी गतिशील है, अत: चंद्रमा मन का कारक ग्रह है। मन को बेहद खुशी या गम हो तो आंखों से आंसू आ जाते हैं, अत: पानी, दूध, शरबत जैसी बहने वाली चीजें चंद्रमा के अधिकार में होती हैं। पानी के साथ पानी से जुड़े पौधे, मछली, कुएं, तालाब, सागर आदि का भी कारक ग्रह चंद्रमा है।

शरीर के हिस्से- चंद्रमा का मन पर प्रभाव होता है। सीना, बहती वस्तुओं का कारक ग्रह होने से शरीर में स्थित द्रव्य जैसे रक्त, मूत्र, पाचक रस, पाचन क्रिया पर चंद्रमा का प्रभाव होता है। रात में प्राकृतिक रोशनी चंद्रमा से ही मिलती है इसलिए दृष्टि व आंख चंद्रमा के अधिकार में है। पुरुषों की बांयी तथा स्त्रियों की दायीं आंख तथा वक्षस्थल पर चंद्रमा का प्रभाव होता है।

गुण- चंद्रमा की रोशनी शीतल है इसलिए शीतलता, ठंडक, पानी से जुड़ा हुआ, हवा में स्थित भांप, गति में बदलाव, सैर की चाह इत्यादि चंद्रमा का गुण धर्म है। चंद्रमा की कर्क राशि कुण्डली में (कालपुरुष की गणना में) चतुर्थ स्थान पर है। यह चतुर्थ स्थान भवन, भूमि, मातृभूमि को दर्शाता है, इसलिए भूमि, भवन, देशप्रेम की भावना का भी विचार चंद्रमा से किया जाता है।

बीमारियां- चंद्रमा का मन पर प्रभाव है। इसलिए मन के रोग, अजीब व्यवहार, चिड़चिड़ापन, उन्माद की बीमारियां आदि चंद्रमा से देखी जाती हैं। पाचन की शिकायतें, बहती वस्तुओं पर अधिकार जैसे खांसी, जुकाम, ब्राकायटीस, हाइड्रोशील, कफ से जुड़ी बीमारियां, दृष्टि दोष चंद्रमा से देखे जाते हैं।

कारोबार- चंद्रमा जल से जुड़ा है इसलिए सिंचाई, जल विभाग, मछली, नौसेना, मोती आदि का कारोबार इससे देखा जाता है। चूंकि चंद्रमा बहती वस्तुओं से संबंधित है इसलिए कैरोसिन, पेट्रोल के कारोबार पर इसका नियंत्रण है। स्नेह का कारक ग्रह होने से फूल, नर्सरी व रसों से जुड़ा कारोबार इसके अधिकार क्षेत्र में आता है।

उत्पाद- चंद्रमा तेज गति वाला ग्रह है इसलिए जल्दी बढ़ने वाली सब्जियां, रसदार फल, गन्ना, शकरकंद, केसर और मक्का इसके उत्पाद हैं। चंद्रमा रंगों का भी कारक ग्रह है इसलिए निकिल, चांदी, मोती, कपूर, मत्स्य निर्माण, सिल्वर प्लेटेड मोती जैसे वस्तुएं बनाने का कारोबार चंद्रमा के अधिकार में है।

स्थान- शीतलता का कारक ग्रह होने से हिल स्टेशन, पानी से जुड़े स्थान, टंकियां, कुएं, हरे पेड़ों से सजे जंगल, दूध से जुड़ा स्थान, गाय-भैंसों का तबेला, फ्रिज, पीने का पानी रखने का स्थान, हैंडपंप आदि को चंद्रमा का स्थान माना जाता है।

जानवर व पंक्षी- छोटे पालतू जानवर, कुत्ता, बिल्ली, सफेद चूहे, बत्तख, कछुआ, केकड़ा, मछली के शरीर पर चंद्रमा का अधिकार होता है। चंद्रमा रस निर्माण का कारक ग्रह है इसलिए रसदार फल, गन्ना, फूल-गोभी, ककड़ी, खीरा, व जल में पनपने वाली सब्जियों पर चंद्रमा का अधिकार है।

आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजादनगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

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