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सूर्य मंडल में सूर्य को राजा और मंगल को सेनापति कहा गया है। आकाश मंडल में यह लाल रंग का दमकता हुआ साफ-साफ दिखाई देता है। शायद उसके लाल गुण के कारण अग्नि पर उसका प्रभाव माना जाता है। सूर्य भी अग्निकारक है, परन्तु सूर्य से मिलने वाली अग्नि जीव-जगत के लिए आवश्यक है और मंगल की अग्नि धर्म प्रलयकारक है। सूर्य उष्ण है और मंगल तप्त। सेनापति होने के कारण शक्ति, अधिकार, पुरुषत्व, शोरगुल, वासना, पशुता इत्यादि बातों पर मंगल का अधिकार है।

शरीर के हिस्से- मंगल अग्नि का कारक है इसलिए समस्त स्नायु मंगल की मेष राशि नैसर्गिक कुण्डली में प्रथम भाव में होने के कारण इस भाव से देखा जाता है। चेहरा और सिर का विचार भी मंगल से किया जाता है। कालपुरुष कुण्डली में अष्टम भाव में मंगल की राशि (वृश्चिक राशि) होने से मूत्राशय, गर्भाशय, गुप्तद्वार और बाहरी अंग लिंग पर मंगल का अधिकार होता है। प्रोटेस्ट ग्रंथि पर भी मंगल का प्रभाव है।

गुण- सेनापति मंगल के पास अधिकार, वृत्ति, प्रभुता, नेतृत्व, लड़ाई आदि गुण होते हैं। इन्हीं गुणों के कारण इसे अधिकार प्राप्त होता है। मंगल शीघ्र प्रकोपी होने के कारण उतावला और दहशत जमाने वाला है। बाहरी अंग-लिंग पर मंगल का प्रभाव होने से मंगल में वासना और लोभ भी है। यौन सुख प्राप्त करते हुए इसका सेनापति का स्वभाव जाग्रत हो जाता है। यह अपने जीवन साथी को कुछ पीड़ा भी प्रदान करता है। यौन सुख के लिए अमानवीय तरीका भी अपनाता है।

बीमारियां- मंगल का अग्नि तत्व होने के कारण गर्मी की बीमारियां, प्रत्येक तरह के बुखार, फोड़ा, खुजली आदि पर मंगल का अधिकार होता है। मंगल का चेहरे पर अधिकार होने के कारण मुंहासे, दिमागी बीमारियां जैसे पागलपन व सिर में रक्त के बहाव पर इसका प्रभाव होता है। लिंग पर प्रभाव व होने से गुप्त रोग, भगंदर, पिस्तुला और यौन रोग, महिलाओं में रक्त प्रदर, हार्निया आदि बीमारियां मंगल के अधिकार में आती हैं। स्नायु पर मंगल का अधिकार होने से स्नायु की बीमारियां, पोलियो, लकवा, दु:ख देने वाला ग्रह होने से वेदना देने वाली बीमारियां जैसे- अल्सर, पेट दर्द, जहर का प्रयोग, जहरीली गैस या उससे उत्पन्न बीमारियों पर इसका अधिकार है।

कारोबार- मंगल सेनापति है इसलिए सुरक्षा, सेनादल, पुलिस, जासूसी, हथियार, नुकीली वस्तुएं आदि का कारोबार मंगल के अधिकार में है। साथ ही कसाई, सर्जरी, हथियार का प्रयोग करने वाला कारोबार, खदानों से निकलने वाला लोहा, तांबा आदि धातुओं का कारोबार तथा अग्नि तत्व होने से प्रत्येक प्रकार की भट्ठियां, वायलर, भांप के इंजन, ऊर्जा प्रकल्प जैसे कारोबार मंगल के अधिकार में हैं।

उत्पाद- मंगल के तीखे गुण के कारण मिर्च-मसाले की वस्तुएं, दालचीनी, अदरक, लहसुन, हथियारों का कारक होने से तलवार, बंदूक, बम और प्रत्येक प्रकार के हथियारों का निर्माण, भूमि का कारक होने से घरों का निर्माण, कांटेदार पेड़ और अग्नि का कारक होने से शराब व तम्बाकू इसके उत्पाद हैं।

स्थान- मंगल का स्वभाव आक्रामक होने से लड़ाई का मैदान, सैनिक छावनी, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी संस्थान इसके स्थान हैं। मंगल निर्दयी ग्रह है अत: कसाईखाना और आपरेशन थियेटर इसके प्रभाव में हैं। उष्ण प्रधान होने से घर में रसोई, गीजर, शौचालय, तहखाना आदि मंगल के अधिकार क्षेत्र में हैं।

जानवर व पेड़-पौधे- शेर, लोमड़ी, कुत्ता आदि पर मंगल का प्रभाव है। कांटेदार पेड़, मसाले की वस्तुओं के पौधे, तम्बाकू, लहसुन आदि तथा लाल रंग के फल व कड़े छिलके वाले फल मंगल के अधिकार क्षेत्र में हैं।

आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

keyword: mangal, jyotish

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