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लगभग एक वर्ष तक वृष के बृहस्पति (गुरु) ने पूरी दुनिया को हिलाया। कहीं तूफान तो कहीं भूकंप, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक खानों-खांचों को तोड़ते भ्रष्टाचार व घोटाले सामने आए, तो जनमानस चौंका ही नहीं हिला भी। जाते-जाते बृहस्पति ने खेल को भी कलंकित कर दिया। 31 मई को वह वृष से निकल कर मिथुन में प्रवेश कर रहा है। उसके इस बदलाव से थोड़ा बेहतर समय होने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन गुरु, शनि व राहु से बन रहा नवपंचक योग अच्छा संकेत नहीं दे रहा है। यह फिर समय में सेंध लगाएगा और राजनीतिक, आर्थिक उथल-पुथल को न्यौता देगा।
ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र के अनुसार आगामी 31 मई को प्रात:काल 6.46 बजे गुरु मिथुन राशि में प्रवेश कर शनि व राहु से नवपंचक योग का निर्माण करेगा। गुरु पंचम पूर्ण दृष्टि से राहु और शनि को देख रहा है और राहु की नवम पूर्ण दृष्टि गुरु पर रहेगी। स्वयं गुरु भी शत्रु राशि में होगा। स्वतंत्र भारत की कुण्डली में वर्तमान में गुरु लग्नवत है परन्तु राशि परिवर्तन (31 मई) के बाद यह द्वितीय स्थान पर हो जाएगा। द्वितीय स्थान देश के परिवार (जनमानस) और आर्थिक स्थिति का है। ज्योतिष के मूल सिद्धान्त के अनुसार बृहस्पति जिस स्थान पर स्थित होता है उस स्थान की हानि करता है। इसलिए देश के आर्थिक व राजनीतिक व्यवस्था को यह पूरी तरह प्रभावित करेगा।

राजनीतिक व्यवस्था- गुरु का मिथुन में गोचर राजनीतिक व्यवस्था के लिए मिश्रित फलदायक है। केन्द्र सरकार अस्थिर हो सकती है। सहयोगी दलों में मतभेद उभर सकते हैं। केन्द्र व राज्यों के मध्य तनाव के कई अवसर आ सकते हैं। एकाधिक राज्यों की सत्ता में परिवर्तन संभव है। राजनेताओं का व्यवहार नैतिकता के स्तर पर गिरा हुआ दिखाई दे सकता है। राजनेताओं के भ्रष्टाचार से संबंधित मामले देश व जनता के सामने उजागर हो सकते हैं।

अर्थव्यवस्था- मिथुन राशि के गुरु का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव अधिक अनुकूल नहीं कहा जा सकता है। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर अपेक्षानुरूप नहीं रह सकती है। कृषि क्षेत्र में लक्ष्यानुरूप वृद्धि दर की अपेक्षा की जा सकती है परन्तु उद्योग क्षेत्र में वृद्धि दर अपेक्षानुरूप कम रहने की संभावना है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में लक्ष्य की प्राप्ति न होने से व्यापार संतुलन ठीक नहीं रह सकता। निर्यात में कम प्रगति के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। महंगाई पर नियंत्रण की बात सोची जा सकती है, परन्तु व्यवहार में उस नियंत्रण का लाभ मिलने की कम संभावना है। गुरु की दृष्टि शनि पर होने से पेट्रोलियम पदार्थों में तेजी आ सकती है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रह सकती है।

कानून व्यवस्था- मिथुन में गुरु के गोचर के दौरान कानून व्यवस्था में सुधार आएगा। कुछ अवांछित चेहरे दंडित होंगे। लोगों का कानून व्यवस्था में विश्वास बढ़ेगा। राजनीतिक भ्रष्ट पुरुष न्यायिक प्रक्रिया के अधिकारों को सीमित करने का प्रयास कर सकते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय संबंध- अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में सुधार की संभावना ज्यादा है। सीमापार से आतंकवादी घटनाओं में कमी आ सकती है। पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में सुधार की संभावना बनेगी।

सामाजिक व्यवस्था- सामाजिक दृष्टि से मिथुन राशि के गुरु की गोचरावधि अधिक आशापूर्ण दिखाई नहीं दे रही है। इस अवधि में समाज में नैतिक पतन दिखाई दे सकता है। रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। समाज में भ्रष्टाचार बढ़ सकता है।

धर्म-संस्कृति- धर्म और संस्कृति की दृष्टि से मिथुन राशि में गुरु का गोचर मिश्रित फलदायक है। धर्म के क्षेत्र में आस्था में वृद्धि के आसार बनेंगे परन्तु धर्मगुरुओं के आचरण के कारण धार्मिक व्यवस्था शर्मसार हो सकती है। सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

स्वास्थ्य- स्वास्थ्य की दृष्टि से गोचर अच्छा रहेगा। रोगों में न्यूनता का योग मिल सकता है। गुरु नवम पूर्ण दृष्टि से कर्म भाव को देख रहा है। इसलिए प्रतिभा के क्षेत्र में चमत्कारिक प्रयोग हो सकते हैं। साथ ही प्रतिभा संपन्न व्यक्तियों का पश्चिमी देशों की ओर पलायन हो सकता है।

राशियों पर प्रभाव
मेष राशि-स्थान परिवर्तन, धन का खर्च बढकर रूकना परंतु आय कम। इष्ट जनों से वियोग, कार्यों में विघ्न और विरोध।
वृष राशि-धर्म कार्यों की ओर रुचि बनेगी, उच्च प्रतिष्ठित लोगों से संपर्क होगा। धन लाभ और वाहन सुख उत्तम रहेगा।
मिथुन राशि-लग्नस्थ गुरु शत्रु राशिस्थ होने से अति संघर्ष के बाद निर्वाह योग्य आय के साधन बनेंगे, धर्म कर्म की ओर खर्च रहेगा।
कर्क राशि-द्वादशस्थ गुरु रहने से आय कम एवं खर्च अधिक रहेंगे। बनते कार्यों में विघ्न पैदा होंगे, वर्ष के आरंभ में शुभ कार्यों पर खर्च कुछ अधिक होगा।
सिंह राशि-धन, लाभ और उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। भूमि वाहन इत्यादी के सुखों की प्राप्ति, विघ्नों के बाद होगी। कोई शुभ कार्य अवश्य होगा।
कन्या राशि-कार्य व्यवसाय में उलझनों के बाद धन प्राप्ति हो। खर्च भी अधिक रहेगा। तनाव के कारण स्वास्थ्य खराब हो सकता है।
तुला राशि-गुरु नवम स्थान में होने से कार्यों में सफलता-लाभ और उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। धर्म, कर्म की ओर रूचि बढ़ेगी।
वृश्चिक राशि-अष्टमस्थ गुरु होने से रोगों का भय, आय कम, खर्च अधिक रहेंगे। घरेलू उलझनों के कारण तनाव प्राप्त होगा।
धनु राशि-सप्तम गुरु होने से धन लाभ एवं वाहन इत्यादी सुखों की प्राप्ति होगी। विशेष संघर्ष के बाद लाभ के अवसर मिलेंगे।
मकर राशि-छठे गुरु होने से खर्च बढ़ेंगे। रोग और गुप्त शत्रुओं का भय रहेगा। निकट बंधु से तकरार व तनाव बढ़ेंगे।
कुंभ राशि-पंचमस्थ गुरु होने से विद्या में सफलता, विवाह आदि सुखों की प्राप्ति, श्रेष्ठ जनों से संपर्क। लाभ और उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे।
मीन राशि-चतुर्थस्थ गुरु होने से साधनों में वृद्धि परंतु सुख में कमी, तनाव व अशांति होगी। वाहन से चोट का भय और खर्च में वृद्धि होगी।

गुरु के अशुभ फल की शांति
गुरु की शुभता बढ़ाने के लिए वृद्ध ब्राह्मणों को भोजन कराना, गुरु वासरी अमावस्या तथा गुरुवार का व्रत रखना, पुखराज धारण करना, पीले वस्त्र, चने की दाल, कांस्य पात्र, सुवर्ण, शक्कर, केले, लड्डुओं तथा धार्मिक ग्रंथों का दान यथा शक्ति करने तथा गुरू के बीच मंत्र का जप 19000 की संख्या में विधि पूर्वक करना शुभ फलदायक रहेगा। पति सौम्य के लिए स्त्रियों को पुखराज धारण करना लाभप्रद रहेगा। प्रत्येक गुरुवार को केसर का तिलक लगाना चाहिए। गुरु बीज मंत्र-ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं गुरुवे नम:।

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  1. Dhanyawad Dwivedi Ji...Main phir se kahoonga ki Internet par Blogs ke bhandaar se nikalkar aapke is adbhit blog par aana mera soubhagya hai...Aabhar.. :)

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  2. Really love ur post and ur grasp in hindi is awesome...

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