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नौ ग्रहों में सूर्य को राजा, चंद्रमा को राजमाता और शुक्र को रानी माना गया है। चंद्रमा व शुक्र दोनों ही स्त्रीकारक ग्रह हैं लेकिन दोनों में सूक्ष्म अंतर है। चंद्रमा स्नेहिल है, पावन है, मां जैसा प्रेम चंद्रमा में है। शुक्र मन मोहता है, उसमें आकर्षण है, आसक्ति है और वासना है। इसलिए शुक्र से विवाह या पत्नी के लिए देखा जाता है। शुक्र को आकर्षण, खूबसूरती व मर्दानगी को चुनौती देने वाला, विषय वासनामय कहा गया है। सभी सुखों की चाह में तल्लीन होने का कारक होने के कारण सारी सुविधाओं से परिपूर्ण घर, वाहन, घर में प्रयुक्त होने वाले टीवी, फ्रिज, रंग, चित्र, महंगे कांच, परदे इत्यादि पर शुक्र का अधिकार है। घर तथा वाहन को सजाने वाली चीजें, शरीर सुख व उसके लिए प्रयुक्त गद्दे, बिछौने, संगीत, इत्र, उत्तेजक पेय भी शुक्र के अधिकार में है। शुक्र के अधिकार वाली वृषभ राशि नैसर्गिक कुण्डली में द्वितीय भाव यानी कुटुम्ब स्थान में आती है। यह स्थान परिवार और खाने-पीने की आदतों का है, इसलिए परिवार सुख, परिवार के लोग, मीठी बातें और रसदार भोज्य पदार्थ शुक्र के अधिकार में है। पुराणों में शुक्र को शुक्राचार्य से संबंधित माना गया है। अत: मंत्र, तंत्र और काम्य साधना भी शुक्र के अधिकार में है। चेहरे की खूबसूरती जिससे बढ़ती है उसपर भी इसका अधिकार है। सुखोपभोग अर्थात केवल शरीर सुख ही नहीं बल्कि शरीर के हर हिस्से को सुख देने वाली चीजें- संगीत, गायन, वादन, आंखों को सुख देने वाली फिल्में, नाटक, खूबसूरत चीजें व चित्र, खूबसूरत जगह, नाक को सुख देने वाले इत्र, सुगन्ध, चंदन जैसी चीजें, जीव को सुख देने वाली स्वादिष्ट मीठी वस्तुएं, शराब, पेय, तम्बाकू, सिगरेट, सिगार आदि चीजें शुक्र के अधिकार में आती हैं।

गुण- शुक्र खूबसूरती का कारक है अत: कलात्मक सोच और आकर्षण के कारण ये प्रतिवादियों पर हावी रहते हैं। यह शरीर सुख का कारक ग्रह है इसलिए भिन्न लिंग के प्रति आकर्षण, अत्यधिक चाह, प्यार का कारक होने से दया, समझ व समझौता शुक्र का गुण है।

शरीर के हिस्से- शुक्र खूबसूरती का कारक ग्रह है इसलिए आंखें, नाक, ठुड्डी, शुक्र की वृषभ राशि द्वितीय भाव में है इसलिए गला, गर्दन, कान के हिस्से, शुक्र यौन का कारक ग्रह है इसलिए लिंग, शुक्राणु, वीर्य पर इसका प्रभाव होता है। शुक्र की तुला राशि नैसर्गिक कुण्डली में सप्तम भाव में आती है, इसलिए इस भाव से देखा जाने वाला मूत्रपिण्ड, मूत्राशय, गर्भाशय आदि हिस्से शुक्र के अधिकार में हैं।

बीमारियां- अधिक सुखों के उपभोग से होने वाली बीमारियां जैसे अधिक शराब पीना, मीठा खाना और अति यौन सुख के कारण होने वाली बीमारियां- आंखों की तकलीफ, नेत्र दोष और यौन रोग शुक्र के कारण होते हैं। शुक्र खूबसूरती का कारक है इसलिए खूबसूरती कम करने वाली बीमारियां और त्वचा के रोग, बाल झड़ना इत्यादि, मूत्राशय व गर्भाशय पर शुक्र का अधिकार होने से उससे जुड़ी बीमारियां- डायबिटीज, गुप्त रोग और स्त्रियों के मामले में मासिक धर्म संबंधी तकलीफ शुक्र के कारण होती है।

कारोबार- शुक्र कला व खूबसूरती का ग्रह है इसलिए चित्रकारी, कलाकारी, अभिनय, गायन, वादन, फोटोग्राफी, कला से जुड़े कार्य, मेकअप, डेकोरेशन, पेंटिंग्स आदि पर इसका अधिकार है। शुक्र मीठी व मधुर चीजों से जुड़ा है इसलिए शहद, मेवा, मिठाई, शक्कर, गुड़, सैक्रिन आदि का कारोबार, शुक्र आंख से संबंधित है इसलिए लेंस, दूरबीन, कांच का कारोबार, शुक्र उत्तेजक पेयों का कारक है इसलिए शराब, चाय, काफी, कोको, अफीम, चरस, गांजा, ब्राउन सुगर जैसी चीजों का कारोबार, शुक्र वाहन का कारक है इसलिए रबर, सनमायका, मोटर गैरेज, वाहन चालक इत्यादि का कारोबार शुक्र से देखा जाता है।

उत्पाद- सजावट की चीजें, सिल्क, रेशम, महिलाओं की वस्तुएं, पेंटिंग, फोटोग्राफी, नाटक, फिल्मों का निर्माण, रंगीन कांच, सजावटी चीजें, गहने, फूल-फल, गुलाब, फूलों के इसेंस, फलों के रस, वाहन, मोटर साइकिल, पानी की जहाज, हवाई जहाज का निर्माण शुक्र से देखा जाता है।

स्थान- नाटक, फिल्में, रंगशाला, विवाह घर, फूलों की नर्सरी, बगीचे, वेडरूम, कास्मेटिक उत्पादक कंपनियां, पलंग इत्यादि शुक्र के स्थान हैं।
जानवर व पक्षी- हाथी, घोड़ा, सुन्दर पक्षी, तितलियां, सजावटी पौधे इत्यादि शुक्र के अधिकार में आते हैं।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमुपर, गोरखपुर

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