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यहूदी धर्म, इसाई धर्म व इस्लाम धर्म, तीनों की मूल भूमि फिलीस्तीन है। ये तीनों धर्म ‘सेमेटिक धर्म’ कहलाते हैं। इन तीनों की मूल मान्यताएं मिलती-जुलती हैं, अंतर कुछ विश्वासों को लेकर है। सेमेटिक का अर्थ है कबाइली। ये कबीलों में रहते थे और पहले इनका कोई मूल देश नहीं था। कालान्तर में फिलीस्तीन और इजरायल के आसपास के देशों में बस गए और यरूशलम में अपना पवित्र मंदिर बनाए। पैगम्बर मूसा के बारे में बताया गया है कि इन्होंने अपने बिखरे लोगों को एकत्रित किया और उन्हें मिश्र की दासता से मुक्त कराकर पवित्र इजरायल देश को बसाया। अत: यह कहा जा सकता है कि पैगम्बर मूसा यहूदी धर्म के आदि संस्थापक महापुरुष हैं।
श्रद्धा के साथ कुरान व बाइबिल में इनका नाम बार-बार आया है। विश्लेषकों के अनुसार (देवशास्त्र के विद्वानों के अनुसार) इनकी विधि संहिता और विचारों पर मिश्र के दार्शनिक विचारों का और बेबीलोन के देवशास्त्र का, मेसोपोटेनियन अवधारणा और हम्बूराबी की विधि संहिता का प्रभाव झलकता है। उस समय कबीलों में आपस में युद्ध हुआ करते थे, वर्चस्व को लेकर संघर्ष होते रहते थे। महापुरुष मूसा ने अपने लोगों को एकत्र कर कनानियो, हिस्तियों व अन्य कबीलों को पराजित कर अपने लोगों के लिए एक राष्ट्र का स्वरूप निर्मित किया तथा विधि संहिता का निर्माण किया। इस विधि संहिता का नाम तौरेत या ‘ओल्ड टेस्टामेंट’ है। ‘ओल्ड टेस्टामेंट’ नाम कालान्तर में इसाइयों द्वारा दिया गया, क्योंकि ईसा के उपदेश को न्यू टेस्टामेंट (नया विधान) और प्राचीन यहूदी ग्रंथ को ओल्ड टेस्टामेंट (पुराना विधान) की संज्ञा प्रदान की गई।
तौरेत अथवा पंचग्रंथ- तौरेत के अंदर पंचग्रंथ हैं- उत्पत्ति ग्रंथ, निर्गमन ग्रंथ, लेवी ग्रंथ, गणना ग्रंथ व विधि विवरण ग्रंथ। तौरेत का अर्थ होता है संहिता। इसका कारण यह है कि इन पांच ग्रंथों में यहूदियों के विधि- निषेध दिए गए हैं। यह विभिन्न अवसरों पर विधि निषेधों का संकलन है। इसे ईश वाणी, शिक्षा, आज्ञा, आदेश, उपदेश आदि विभिन्न अर्थों में ग्रहण किया गया है। पंचग्रंथ (पेंटाटीच) का प्रथम ग्रंथ उत्पत्ति ग्रंथ कहलाता है। इसमें सृष्टि रचना का वर्णन है। निर्गमन ग्रंथ में मिश्र से यहूदियों के निर्गमन का वर्णन है। लेवी ग्रंथ में लेवी वंश के याजकों और उपासकों के लिए विहित विधि निषेध दिए गए हैं। गणना ग्रंथ में यहूदियों की जनगणना का वर्णन है। विधि विवरण ग्रंथ में पुन: विधि निषेधों का पुनरुल्लेख है। इन पांच ग्रंथों का रचयिता संसार में इजरायल की धार्मिक महत्ता पर जोर देता है। यहूदी जाति की उत्पत्ति व ईश्वर द्वारा मानव मुक्ति की योजना में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए उस जाति के चुनाव का वर्णन करता है। तौरेत के अनुसार ईश्वर ने इस विशेष जाति को चुना और इसके लिए विधान निर्धारित किया। साथ ही उन्होंने यह वचन दिया कि मुक्तिदाता इसी जाति में जन्म लेंगे।
कुछ दिन पहले तक सामान्यत: यह माना जाता था कि इन पांच ग्रंथों की रचना मूसा ने की है। वैसे पंचग्रंथ में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि मूसा इन ग्रंथों के रचयिता हैं। यत्र-तत्र यह उल्लेख मिलता है कि मूसा ने यह लिखा। लेकिन यह कुछ अंश विशेष के लिए है न कि संपूर्ण ग्रंथ के लिए। 19वीं शताब्दी के अंत में कुछ समालोचकों ने इस ग्रंथ की रचना के संबंध में विभिन्न मतों का प्रतिपादन किया। उनका मत है कि पंचग्रंथ का संकलन विभिन्न स्रोतों से किया गया है। कुछ चार प्रमुख स्रोतों का उल्लेख करते हैं और कुछ इससे अधिक स्रोतों का। कालान्तर में विभिन्न अंशों को एक ग्रंथ के रूप में संयोजित कर फिर सुविधा के लिए पांच खंडों में इसे विभक्त कर दिया गया। इस मत को स्वीकार करने वाले विशेषज्ञों का विचार है कि पंचग्रंथ में संकलन का समय जानना दुरूह कार्य है।
विश्वास- यहूदी धर्म के विश्वास के अनुसार ईश्वर ने सर्वश्रेष्ठ होने का वरदान यहूदी लोगों को प्रदान किया है। ये मूर्ति पूजा का घोर विरोध करते हैं। पुनर्जन्म में इनका विश्वास नहीं है। यही जीवन आदि और अंत है। मनुष्यों के कर्म के अनुसार उन्हें स्वर्ग या नरक में डाला जाता है। यहोबा (परमेश्वर) के आदेश का पालन करने से स्वर्गलोक और उल्लंघन से नरक की प्राप्ति होती है।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र, 430 बी आजाद नगर, रूस्तमपुर, गोरखपुर

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  1. Dhanywad Dwivedi Ji, Ek Nayi Jankari mili aaj...aabhar..!!

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  2. Sarvashreshth voh log hotein hain jinhe apni shreshth hone ka ghamand na ho. Agar hum sabhi eeshwar ke santaan hain toh unhone bas yahudi/muslim/isayee ya kissi ek goshthi ko shreshth hone ka vardaan kaise de diya?!

    Jaankari ke liye shukriya. Nice to see religious knowledge from elsewhere in the world here, interesting post. Hindi pad lete hain, likh nahi paate, ghalatiyan kshama karein.

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    1. apae achhi hindi likhi hai, aabhar

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