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1-शनि जब मार्गी हो तो उस समय शत्रुता और शत्रुनाश के लिए समस्त कार्यों में सफलता मिलती है।
2-शनि जब वक्री हो तो दो मित्रों में एवे दो प्रेमियों में विद्वेषण एवं उच्चाटन के लिए सफलता मिलती है।
1.गुरु जब वक्री होता है तो भूमि, जायदाद व प्रतिष्ठा में न्यूनता व कमी लाने वाला कार्य कराता है।
2-इसके विपरीत जब-जब वह मार्गी होता है तो भूमि जायदाद, औहदे में बढ़ोत्तरी तथा सामाजिक प्रतिष्ठा व अन्य कार्यों में सफलता के कार्य करने हेतु किये गए तिलस्मों (यन्त्रों) में सफलता मिलती है।
1-मंगल जब मार्गी होता है तब यश, मान, पद, प्रतिष्ठा और किसी वस्तु का आयोजन- संयोजन, संगठन के लिए किये गए कार्यों में सफलता मिलती है।
2-इसके विपरीत इसके वक्री होने पर सभा, फौज को नष्ट करने के लिए विघटन सम्बन्धित सामूहिक कार्यों के लिए बचाये गए तिलस्मों (यन्त्रों) में सफलता मिलती है।
1-इसके मार्गी होने पर स्त्री-जाति में प्रेम-सम्बन्ध, मित्रता एवं ऐश्वर्यशाली वस्तुओं के क्रय-विक्रय, संयोजनात्मक कार्य, पार्टी, विवाह सगाई इत्यादि कार्यों में सफलता मिलती है।
2-इसके विक्री होने पर गर्भपात, संताननाश हेतु बनाये गए तिलस्मों (यंत्रों) में विशेषकर सफलता मिलती है।
1-बुध मार्गी होने पर यश, मान और हर प्रकार की विद्या प्राप्त करने हेतु बनाये गए तिलस्मों (यंत्रों) में सफलता मिलती है।
2-इसके विपरीत यह वक्री होने पर किसी को जलील करना, अपमानित करना व नीचा दिखाने के लिए किये गए तिलस्मों (यंत्रों) में सफलता मिलती है।
ग्रहों के मार्गी, वक्री में ठीक समय का अनुसन्धान-
1-तुला राशि के एक अंश पर किसी ग्रह के वक्री, मार्गी हो जाने पर उस समय केवल एक व्यक्ति के लिए शत्रुता या तकलीफ पहुंचाने व समाप्त करने के लिए किये गए कार्यों में सफलता मिलती है।
2-तुला राशि के दो अंशों पर किसी ग्रह के वक्री या मार्गी हो जाने पर ग्रहकाल में दुश्मन को काबू करने एवं उसको अनुकूल बनाने के लिए किये गए कार्यों में सफलता मिलती है।
3-तुला राशि के तीन अंशों पर वक्री-मार्गी हुए ग्रहकाल में ऐसे रहस्य का पता चल सकता है, जिसके बारे में जानना अत्यन्त कठिन है।
4-तुला राशि को आठ अंशों पर वक्री-मार्गी होने वाले ग्रहकाल में विपरीत लिंगी के प्रति किये गए प्रेम सम्बन्धी कार्यों व वशीकरण यंत्रों में तत्काल सफलता मिलती है।
5-तुला राशि के ग्यारह अंशों में वक्री-मार्गी हुए ग्रहकाल में विपरीत रास्ते पर गए हुए व्यक्ति को सही रास्ते पर लाने के लिए किये गए कार्यों में सफलता मिलती है।
6-तुला का शुक्र जब तेरह अंशों में वक्री अथवा मार्गी हो जाये तो किसी औरत को बदचलन करने के लिए, उसको पथभ्रष्ट करने के लिए किये गए प्रयासों में सफलता मिलती है।
7-तुला का शुक्र चौदह अंशों तक वक्री अथवा मार्गी हो जाये तो उस समय कोई भी औषधि, दवा अथवा लोशन जो सुन्दरता को बढ़ाने वाला हो, बनाया जाये तो उसमें आश्चर्यजनक सफलता मिलती है।
8-तुला का शुक्र जब तीस अंशों पर वक्री अथवा मार्गी हो तो उस समय किसी इमारत, भवन व बड़ा भवन को हमेशा-हमेशा के लिए कायम रखने के लिए उसकी कीर्ति को अखण्ड बनाने के लिए किये गए प्रयासों में सफलता मिलती है।


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