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ब्रह्माकुमारीज़ संस्था द्वारा आयोजित मीडिया महासम्मेलन के तीसरे दिन खुले सत्र की अध्यक्षता करते हुए सोसायटी आॅफ मीडिया इनिशिएटिव फॉर वैल्यूज के राष्टीय संयोजक प्रो.कमल दीक्षित ने सांस्कृतिक प्रदूषण पर अंकुश लगाने में मीडिया की भूमिका विषय पर सम्बोधन के दौरान कहा कि सकारात्मक सोच में आत्मबल के सहारे कोई भी लक्ष्य प्राप्त करना असंभव नहीं है। संस्था को साधुवाद देते हुए उन्होंने कहा कि केवल प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ही मीडिया को प्रतिवर्ष आत्म-चिंतन करने का मंच प्रदान करता है। संस्था यह महसूस करती है कि स्वयं परिवर्तन के सहारे विश्व परिवर्तन लाने की शक्ति मीडिया में है लेकिन उसका सही एहसास कराना होगा। उन्होंने कहा कि मीडिया अर्द्ध सत्य को सत्य की तरह प्रस्तुत करता है। स्वार्थ पोषित सूचनाओं का प्रसार हो रहा है। हमारी शक्ति का नकारात्मक प्रयोग बंद होना चाहिए।
चर्चा की शुरुआत करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रो.संजीव भानवत ने कहा कि सांस्कृतिक परिवेश वाली सामग्री टीवी चैनलों में प्राइम टाइम पर नहीं परोसी जाती। संचार माध्यम सूचना व शिक्षा की बजाए मनोरंजन को अधिमान दे रहे हैं। लेकिन आकाशवाणी की भूमिका क्षेत्रीय एवं अंचलिक संगीत व संस्कृति के अदान-प्रदान में सदैव सराहनीय रही है। उनका कहना था कि व्यवसायिक दृष्टिकोण हावी होने के कारण नित्य प्रति उत्तेजक व भोंडे संगीत से भरे एलबम लगातार रिलीज हो रहे हैं। ब्रेकिंग न्यूज के नाम पर तनाव व सनसनी फैलायी जा रही है। इस तरह के सांस्कृतिक प्रदूषण को थामना होगा।
उड़ीसा समाचार के मुख्य संपादक प्रदोष पटनायक इस बात से सहमत नहीं थे कि पाश्चात्य संस्कृति पूर्णत: प्रदूषित है और इसी का अंधानुकरण भारतीय संस्कृति के अवमूल्यन का कारण है। उन्होंने कहा कि तनाव भरी कार्य-प्रणाली के कारण गत पंद्रह वर्षों में अनेक मीडियाकर्मियों ने भी आत्महत्या जैसा दुर्भाग्यपूर्ण रास्ता अपनाया। अब समय आ गया है कि आत्म-मंथन करके मूल्यों की सुरक्षा के लिए कारगर कदम उठाये जायें।
विजन वर्ल्ड न्यूज के संपादक अशीष गुप्ता ने मीडिया द्वारा लोगों को कटघरे में खड़े करने और न्यायपालिका का अधिकार अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति को खतरनाक बताते हुए सलाह दी कि सकारात्मक, प्रेरक व शिक्षाप्रद समाचारों को मुख्य पृष्ठ पर स्थान देकर वर्तमान परिवेश को बदलना चाहिए।
युग प्रभात के संपादक जीवन साहू ने याद दिलाया कि मॉरीशस में ले जाये गये असंख्य भारतीयों ने अपनी संस्कृति नहीं छोड़ी। इसी कारण उनमें से ही अंतत: प्रधानमंत्री का चयन हुआ। नेताओं को भ्रष्टाचार व अपसंस्कृति के लिए जिम्मेवार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि अढाई सौ से अधिक बहुदेशीय कम्पनियां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय संस्कृति पर प्रहार कर रही हैं। मीडिया अपने आत्मबल व दृढ़ शक्ति से इसके वेग को थाम सकता है। हमें विश्वास रखना चाहिए कि भारतीय संस्कृति पर भले ही धूल जम जाये लेकिन वह कभी नष्ट नहीं होगी। कार्यक्रम का सकुशल संचालन चंडीगढ़ की बी.के.पूनम ने किया।
इससे पूर्व प्रथम खुले सत्र में भ्रष्टाचार मुक्त समाज की संरचना में मीडिया की पहल विषय पर बी.के.सुशांत, ग्लोबल गवर्नंेस न्यूज के मुख्य संपादक कुमार राकेश, वरिष्ठ पत्रकार गिरिजा शंकर, दैनिक आज के गोरखपुर संस्करण के संपादक अखिलेश चंद एवं वरिष्ठ पत्रकार जय कृष्ण गौड ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता बड़ौदा की बी.के.डॉ.निरंजना ने की एवं संचालन अहमदाबाद की बी.के.नंदिनी ने किया।

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