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पिछले वर्ष 23 दिसम्बर 12 को राहु व शनि की युति हुई जो 12 जुलाई 14 तक चलेगी और शनि तुला राशि में 2 नवम्बर 14 तक रहेगा। शनि व राहु आकस्मिक परिवर्तन के द्योतक हैं। यह युति प्राकृतिक और मानवीय आपदा को जन्म देती है। शनि-राहु के संगम ने ही उत्तराखंड में गुल खिलाया है। उत्तराखंड में बाढ़ और भारी वर्षा तथा भू-स्खलन जैसी घटना घटी है। जिसमें हजारों जानें गर्इं और लाखों लोगों को त्रासदी झेलनी पड़ी। इसका मुख्य कारण शनि का 18 फरवरी से 18 जुलाई तक वक्री रहना है।

यह बातें ज्योतिषाचार्य पं. शरदचंद्र मिश्र ने कही। धर्मचक्र के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि शनि व राहु का गठबंधन अर्थव्यवस्था में भी विश्वव्यापी परिवर्तन ला सकता है। राहु धोखा करता है और शनि उसे उजागर करता है। शनि न्यायाधीश है और दोषियों को दंडित करता है। इस अवधि में कई भूकंप आए और अमेरिका में बड़ा तूफान व चक्रवात आया। ये दोनों ग्रह मिलकर प्राकृतिक आपदाओं को निमंत्रित करते हैं। निकट भविष्य में भी ये दोनों ग्रह ऐसे गुल खिलाएंगे कि जनता अवाक रह जाएगी।


उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब शनि-राहु की जोड़ी आकाश में आई है, भारत व विश्व में अनेक अप्रत्याशित घटनाएं हुई हैं। ऐसी घटनाएं भी हुई जिसने विश्व का नक्शा ही बदल दिया। सन 1864-65 में शनि-राहु की युति थी, उस समय अमेरिका में सिविल वार हुआ, अब्राहम लिंकन की हत्या हुई और भयंकर बर्फबारी हुई थी। उस समय वहां की आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई और एक नए युग का आरंभ हुआ। इससे पहले 1959 में भारत में औरगंजेब ने अपने भाई दाराशिकोह को मरवा दिया और अनेकानेक हिन्दुओं का कत्ल कराया। इधर के वर्षों में 1975 में जब राहु-शनि की जुगलबंदी थी तो भारत में इमरजेंसी लगी, लोग जेलों में ठूसे गए, जनता में भय का वातावरण रहा। 1994 में जब यह युति थी तो संपूर्ण विश्व में गणेशजी दूध पी रहे थे और अफवाहों से जनता भ्रमित हुई थी। यह युति प्रत्येक 11 वर्ष बाद आती है लेकिन प्रत्येक बार ग्रहों की स्थिति अलग-अलग होती है और घटनाएं अपने तरह की नई परन्तु अप्रत्याशित होती हैं।

जिनकी कुण्डली में राहु 3, 6, 10 या 11वें स्थान पर है और उच्च मिथुन व वृष राशि में है, उनका पूर्ण प्रवर्धन होगा। जिनकी साढ़ेसाती चल रही है जैसे जिनकी कन्या, तुला और वृश्चिक राशि है और शनि उच्च का है तथा कुण्डली में 3 या 11वें भाव में है, उन्हें इस अवधि में अच्छा लाभ मिलेगा, परन्तु कर्क व मीन राशि वाले जिनका शनि क्रमश: चतुर्थ व अष्टम है, उन्हें नवम्बर 2014 तक सतर्क रहने की आवश्कता है।

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