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सभी कार्यों में स्वास्तिक को मांगलिक चिह्न मानकर बनाया जाता है। इस स्वास्तिक के अंदर गणपति, गौरी, कूर्म, अनन्त और पृथ्वी देवता निवास करते हैं। यह स्वास्तिक वीसा यंत्र इन सभी की कृपा प्राप्त करवाता है। यह यंत्र ऐसे व्यक्तियों के लिए बहुत लाभदायक है जिनके कार्यों में अंतिम समय पर कोई न कोई अड़चन आ जाती है और सारी मेहनत बेकार चली जाती है। इस यंत्र के प्रभाव से समस्त कार्य और साधनाएं निर्विघ्न रूप से पूर्ण होती हैं।

विधि- इस यंत्र को दीपावली, होली, सर्वार्थ सिद्ध योग अथवा नवरात्र से प्रारंभ कर 9 दिनों तक प्रतिदिन अनार की कलम से 108 की संख्या में लिखना है। अंतिम दिन इस यंत्र को भोजपत्र पर बनाएं। इस यंत्र की पूजा करके उसे दाहिनी भुजा या गले अथवा पूजा गृह में स्थापित करें। यदि किसी कार्यवश बाहर जाना पड़े तो इसे अपने साथ लेते जाएं। इससे समस्त विघ्न समाप्त हो जाते हैं। यह यंत्र कुशल प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा बनवाया जाय तो बहुत हितकर होता है।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र

keyword: yantra, kavach

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