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लाल किताब के बारे में अनेक भ्रांतियां हैं। कुछ लोग कहते हैं कि लाल किताब भृगु संहिता, अर्जुन संहिता, धु्रव नाड़ी ग्रंथ और अन्य नाड़ी जैसे किताबों का ही हिस्सा है। कुछ लोगों का कथन है कि पहले आकाशवाणी हुई, उसके बाद लाल किताब की रचना हुई। कुछ लोगों का मत है कि लाल किताब अरब देश की पुस्तक है, लेकिन मुस्लिम संस्कृति में हरे रंग को शुभ माना जाता है क्योंकि इस्लाम का उदय रेगिस्तान में हुआ और से हरीतिमा या हरे रंग के लिए लालायित रहे। इसलिए इस संस्कृति में हरे रंग का महत्व अधिक है। यदि यह पुस्तक अरब देश में रची गई तो इसका नाम लाल किताब न होकर हरी किताब होना चाहिए था। ‘लाल किताब’ नाम भारतीय प्रभाव को दर्शाता है क्योंकि भारतीय परंपराओं में लाल रंग को विकास का रंग माना गया है।

लाल किताब में फलादेश करने के लिए यह मान लिया गया है कि प्रत्येक जन्मकुण्डली में चाहे उसका लग्न कुछ भी हो, लग्न में मेष, द्वितीय भाव में वृष, तृतीय भाव में मिथुन, चतुर्थ में कर्क, पंचम सिंह, षष्ठ में कन्या, सप्तम में तुला, अष्टम में वृश्चिक, नवम में धनु, दशम में मकर, एकादश में कुंभ और द्वादश में मीन राशि मानी जाएगी। लग्न में आने वाली राशियों के स्थान पर इन ग्रहों की राशियों की उपस्थिति मानी गई है, जो इन भावों के कारकों की हैं। इसमें प्रथम भाव में सूर्य को माना गया है। द्वितीय भाव में गुरु, तृतीय में मंगल, चतुर्थ में चंद्रमा, पंचम में गुरु, षष्ठम में केतु, सप्तम में शुक्र व बुध, अष्टम में शनि व मंगल, नवम में गुरु, दशम में सूर्य, एकादश में गुरु और द्वादश में शनि को माना गया है। ऐसा मानकर विविध ग्रहों के विविध भाव का विचार किया जाता है।

लाल किताब का इतिहास- कहा जाता है कि लंकाधिपति रावण ने सूर्य के सारथी अरुण से यह विद्या प्राप्त की थी। रावण की दुनिया समाप्त होने के बाद यह ग्रंथ किसी प्रकार ‘आद’ नामक स्थान पर पहुंच गया, जहां इसका अनुवाद अरबी और फारसी भाषा में किया गया। आज भी यह मान्यता है कि यह पुस्तक फारसी भाषा में उपलब्ध है। यह ग्रंथ आजकल पाकिस्तान के पुस्तकालय में सुरक्षित है और उर्दू भाषा में है। परन्तु इस अरुण संहिता या लाल किताब का कुछ अंश गायब है। एक मान्यता के अनुसार एक बार लाहौर में जमीन खोदने का कार्य चल रहा था, उसमें से तांबे की पट्टिकाएं मिलीं जिनपर उर्दू एवं अरबी भाषा में लाल किताब लिखी मिली। सन 1936 में अरबी भाषा में लाहौर में प्रकाशित की गई और यह प्रसिद्ध हो गई।

भारतीय ज्योतिष और लाल किताब में अंतर- भारतीय ज्योतिष में लग्न की महत्ता है। जातक के जन्म के समय पूर्वी क्षितिज के आधार पर जन्म लग्न बनता है। परन्तु लाल किताब में लग्न का कोई महत्व नहीं है। लाल किताब में मेष राशि को ही लग्न मान लिया लिया जाता है। लाल किताब में सरल टोटके बताए गए हैं जो सटीक बैठते हैं, जबकि भारतीय ज्योतिष में ग्रहों के जप, रत्न, हवन और पूजा-पाठ पर ज्यादा जोर है। लाल किताब के अनुसार राशि शरीर है तो ग्रह आत्मा। ग्रह और राशि की संदेहात्मक स्थिति का उपाय और ग्रहों के अशुभ फल से रक्षा करना ही इसका उद्देश्य है। लाल किताब में नीच ग्रहों की वस्तुओं के दान अथवा जल में प्रवाहित करने से उच्च ग्रह के मित्र अथवा अशुभ ग्रह की वस्तुओं को उसके साथ मिलाकर नीच ग्रह को उच्च करने का प्रयास किया जाता है। मनुष्य पूर्व जन्म में जैसे कार्य करता है वैसा ही फल इस जन्म में भोगता है। इसलिए दानादि या शुभ कर्म द्वारा बुरे कर्म फल को अच्छे फल में परिवर्तित किया जा सकता है।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र

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