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चंद्रमा छठें, आठवें, दशवें, ग्यारहवें, बारहवें घर में अशुभ फल प्रदान करता है। दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें, सातवें एवं नवें घर में शुभ फल प्रदान करता है। अकेला चंद्रमा किसी भी स्थान में बैठा हो तो जातक विनम्र, सद्व्यवहारी एवं दयालु होता है। चंद्रमा बारहवें घर में बैठा हो जो उसके अशुभ फल मिलते हैं। चंद्रमा के अशुभ होने पर जातक की फसल सूख जाती है। दुधारी पशुओं की मृत्यु हो जाती है। ऐसे व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति कम हो जाती है।

उपाय- रविवार की रात्रि को सफेद धातु के बर्तन में दूध अथवा जल मिश्रित दूध मस्तिष्क के पास रखकर सोएं और सोमवार को प्रात:काल उठते ही वह दूध पीपल या बबूल के पेड़ पर बिना बोले चढ़ाएं। चावल, चांदी तथा प्राकृतिक जल सदा अपने पास रखें। बहते जल में चांदी का खिलौना बहाएं। कन्या को हरे रंग का वस्त्र दान करें। रात को दूध न पियें वरन दूध का दान करें। श्मशान भूमि के कुएं का जल लाकर घर में रखें। भैरव मंदिर में दूध चढ़ाएं।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र

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