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माह-ए-रमजान खुदा की इबादत का समय है। दुनियाबी कार्यों से दूर रहकर रूह को ताकतवर बनाने का यह समय है। यह पूरा महीना इंसान को उसके मूल स्वभाव में लौटने की प्रेरणा देता है। पूरे माह मुसलमान रोजा रखकर खुदा की इबादत करते हैं और इसके बाद खुशियों का त्योहार ईद धूमधाम से मनाया जाता है।
यह बातें इमामबाड़ा स्टेट के सज्जादानशीन व शहर की अजीमुश्शान शख्सियत अदननान फर्रूख शाह (मियां साहब) ने कही। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना रूह को पाक बनाता है। रूह जितनी ही पाक होती जाती है उतनी ही ताकतवर होती जाती है। रूह की ताकत ही इंसान को खुदा के नजदीक ले जाती है। रमजान का पूरा महीना सारे इंसानों को इस बात की दावत देता है कि तुम अपनी रूह की हैसियत को समझो और खुदा के हुक्म को सब पर भारी समझो। मुसलमान इसी वजह से खुदा के हुक्म पर साढ़े तीन बजे रात से शाम 7 बजे तक खाना-पीना आदि छोड़ देते हैं और इसी के साथ-साथ वे बुराइयां भी जिनसे रूह गंदी होती है। जैसे गाली देना, किसी की पीठ पीछे बुराई करना, दूसरे को धोखा देना, सब हराम होता है। पूरे रमजान महीने में रूह को ताकतवर बनाने के लिए मुसलमानों के सारे कार्यक्रम होते हैं। गरीबों की मदद करना, भूखों को खाना खिलाना, जकात की रकम निकालकर गरीबों में खुशहाली पैदा करना और इसी के जरिए मुफलिस, कमजोर, गरीब बच्चों के लिए तालीम की व्यवस्था कर उनको बेहतरीन शहरी व अच्छा इंसान बनाना, फितरा की रकम देकर उनके अंदर त्योहार की खुशहाली देना ऐसे बहुत से काम होते हैं, जिनसे रूह को ताकतवर बनाया जाता है। और अपने तौर पर नमाजों में दिल को लगाना, कुरआन की तिलावत करना, रातों में पूरी नमाज के बाद 20 रकात तरावीह की नमाज अदा करना, पूरा कुरआन सुनना और रातों में उठकर तहज्जुत की नमाज पढ़ना, फिर थोड़ा सा नाश्ते के तौर पर सेहरी खा लेना और इसके बाद दिन भर रोजा रखना। ये सब कार्यक्रम रूह को ताकतवर बनाने के लिए होते हैं। क्योंकि जिस्म में वो रूह ही है जिसकी मौजूदगी में ही जिस्म की हैसियत है। रूह के बाद यह जिस्म मिट्टी हो जाता है।

keyword: islam, ramajan

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