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सूर्य जनित अरिष्ट- लाल किताब के अनुसार सूर्य छठें, सातवें व दसवें घर में अशुभ फल देता है। पांचवें, नौवें, ग्यारहवें, बारहवें घर में शुभ फल प्रदान करता है। जन्म कुण्डली में यदि अशुभ हो तो ऐसा जातक दु:ख एवं दरिद्रता भोगता है। जातक के शरीर में भी बहुत पीड़ा होती है और कालान्तर में चलने-फिरने में भी असमर्थ हो जाता है। पशुपालन से भी हानि होती है।
उपाय- रविवार को उपवास रखें तथा भगवान विष्णु की पूजा करें। रविवार को गुड़ व तांबे का दान करें। तामसी पदार्थों का सेवन न करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। रविवार को गुड़ व तांबा पानी में बहाएं। रात्रि के समय आग को दूध से बुझाएं तथा प्रात:काल मुंह में गुड़ या शुद्ध मिष्ठान डालकर ऊपर से जल से पियें। रविवार के दिन सूर्योदय से पूर्व गुड़ से बनी वस्तु पीपल वृक्ष के नीचे रख आएं। गेहूं, गुड़ तथा तांबे का दान करें अथवा जल में तांबे का पैसा प्रवाहित करें।
आचार्य शरदचंद्र मिश्र


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